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रक्षक ही बना भक्षक: छत्तीसगढ़ में बाघ-तेंदुए के शिकार मामले में डिप्टी रेंजर समेत 9 गिरफ्तार..!

दंतेवाड़ा/रायपुर। छत्तीसगढ़ के जंगलों में वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। दंतेवाड़ा और बीजापुर क्षेत्र के जंगलों में बाघ और तेंदुए के अवैध शिकार के मामले में विभाग ने एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए डिप्टी रेंजर समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि वन्यजीवों की रक्षा के लिए तैनात सरकारी कर्मचारी ही इस घिनौने अपराध में शामिल पाया गया।

विभागीय मिलीभगत का खुलासा

​वन विभाग और राज्य उड़नदस्ता टीम की संयुक्त जांच में यह तथ्य सामने आया कि इस अवैध गतिविधि में डिप्टी रेंजर देवी प्रसाद ओयाम सीधे तौर पर शामिल था। ओयाम की मिलीभगत के कारण ही शिकारियों को जंगल में प्रवेश करने और फंदे लगाने में आसानी हुई। जांच टीम के अनुसार, आरोपियों ने लोहे के तारों और मांस का लालच देकर बाघ और तेंदुए को फंसाया, जिससे दोनों वन्यप्राणियों की मौत हो गई।

​बरामद किए गए बाघ की उम्र लगभग 3 वर्ष बताई जा रही है। आरोपी इन शिकार किए गए जानवरों की खाल को ऊंचे दामों पर बेचने के लिए रायपुर ले जाने की फिराक में थे।

जाल बिछाकर पकड़े गए आरोपी

​वन विभाग को सूचना मिलने के बाद लगातार निगरानी की जा रही थी। ग्राम केशापुर में दी गई दबिश के दौरान तेंदुए की खाल बरामद हुई, जिसके बाद कार्रवाई तेज की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:

  • ​देवी प्रसाद ओयाम (डिप्टी रेंजर)
  • ​लक्ष्मण तेलाम, देवीराम ओयाम, रमेश कुड़ियाम
  • ​फरसोन पोयामी, सेमला रमेश, सुखराम पोडियाम
  • ​छत्रू कुड़ियाम, मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी

सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज

वनमंडलाधिकारी (दंतेवाड़ा) रामकृष्णा ने बताया कि बाघ और तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की ‘अनुसूची-1’ के तहत संरक्षित प्राणी हैं। इनके शिकार को अत्यंत गंभीर श्रेणी में रखा गया है। सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। विभाग अब इस मामले का चालान जल्द से जल्द न्यायालय में पेश करने की तैयारी कर रहा है।

‘अपराधी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा’ – वन मंत्री

​इस पूरे मामले पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, “राज्य में वन्यजीवों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिकार एक गंभीर अपराध है और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा, चाहे वह विभाग का ही कर्मचारी क्यों न हो।”

​प्रधान मुख्य वन संरक्षक व्ही. श्रीनिवास राव और वन्यप्राणी संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन में हुई इस सफल कार्रवाई के लिए टीम को सम्मानित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।