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मजदूर की मौत पर बड़ा एक्शन: ओम रूपेश कंपनी का अवैध निर्माण टूटा; कांग्रेस पार्टी के ‘मौन’ पर भड़के गोपाल अग्रवाल, दागे तीखे सवाल

रायगढ़ (रायगढ़ सृष्टि)। चिराईपानी क्षेत्र में स्थित ओम रूपेश कंपनी के लेबर क्वार्टर की दीवार गिरने से हुई एक महिला की मौत के बाद अब प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। भारी जनविरोध और शिकायतों के बाद राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं और अतिक्रमण उजागर हुए। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कंपनी द्वारा किए गए अवैध निर्माण और बाउंड्रीवाल को ढहा दिया है। वहीं दूसरी ओर, इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा समर्थित जिला पंचायत सदस्य गोपाल अग्रवाल ने घटना की जांच करने आई कांग्रेस कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक न होने पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।

जांच में खुली अतिक्रमण की पोल, सरकारी जमीन और निजी भूमि पर भी कब्जा

बीते 18 जून को दीवार गिरने के कारण हुए दुखद हादसे के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का भारी दबाव था। 20 जून को प्रशासनिक टीम जांच के लिए मौके पर पहुंची। तैयार किए गए पंचनामे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि अनावेदक शंकर लाल अग्रवाल द्वारा सड़क मद की शासकीय भूमि पर 2 फीट चौड़ी कंक्रीट नाली का निर्माण कराया जा रहा था। इसके अलावा सड़क किनारे कच्ची नाली से सटाकर गंदा पानी छोड़ा जा रहा था।

​पास ही संचालित क्रेशर में स्लेग चूरा का भारी भंडारण किया गया है, जिसके दबाव से दीवार के दोबारा ढहने की आशंका ग्रामीणों ने जताई थी। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि भूमि स्वामी ममता जायसवाल की जमीन पर भी शंकर लाल अग्रवाल ने अवैध रूप से अहाता (बाउंड्रीवाल) बना लिया था। इन सभी शिकायतों के सही पाए जाने के बाद तहसीलदार और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण कर बनाई गई बाउंड्रीवाल को तोड़ा गया। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि आगे की वैधानिक कार्रवाई भी जारी है।

तालाब, रास्ते और जंगल की जमीन पर भी कब्जे की शिकायत

इस पूरे मामले को लेकर शुरू से ही मुखर रहे जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 2 के सदस्य व लाखा निवासी गोपाल अग्रवाल ने बताया कि ओम रूपेश कंपनी द्वारा फॉरेस्ट की जमीन, तालाब और सार्वजनिक रास्तों पर भी कब्जा किया गया है। उनकी शिकायत के आधार पर ही राजस्व अमले ने यह कार्रवाई की है और अभी क्षेत्र से अन्य अतिक्रमण भी हटाए जा रहे हैं।

कांग्रेस की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल, क्या पूर्व की नजदीकी है वजह?

प्रशासनिक कार्रवाई के बीच गोपाल अग्रवाल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि घटना के बाद कांग्रेस नेता पूरे लाव-लश्कर के साथ मौके पर जांच करने पहुंचे थे, लेकिन आज तक उस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या प्रबंधन के साथ कांग्रेस की पूर्व की नजदीकी इस देरी का कारण है? बड़ी-बड़ी बातें कर जनता को बरगलाने वाली कांग्रेस अब सच सामने लाने से क्यों कतरा रही है?

“मैं भाजपा का समर्पित सिपाही, मानवता के नाते निभाया अतिथि धर्म”

विगत दिनों कांग्रेस के जांच दल के साथ मौके पर देखे जाने के बाद गोपाल अग्रवाल को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इन अफवाहों पर विराम लगाते हुए गोपाल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वे भारतीय जनता पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता हैं।

​उन्होंने कहा, “मुझे कांग्रेस की जांच समिति से कोई सरोकार नहीं है। मैं तो घटना के बाद से ही एक स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के नाते उचित कार्रवाई के लिए सुबह से ही मौके पर मौजूद था। उसी दौरान वहां कांग्रेस की टीम आ गई। स्थानीय होने के कारण मेरा वहां उपस्थित रहना मानवता के नाते आवश्यक था। राजनीतिक असमानता से ऊपर उठकर मैंने केवल ‘अतिथि धर्म’ का पालन किया। मुझ पर लग रहे सारे आरोप बेबुनियाद हैं, मेरी लड़ाई जनता के हक और उद्योग प्रबंधन की लापरवाही के खिलाफ जारी रहेगी।”