छत्तीसगढ़ में इस वर्ष धान खरीदी महाअभियान ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 13 जनवरी 2026 तक राज्य में 17,77,419 किसानों से 105.14 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) धान की खरीदी हो चुकी है। इसके एवज में किसानों को अब तक कुल 23,448 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। यह 13 जनवरी तक की तारीख में अब तक का सबसे बड़ा खरीद और भुगतान रिकॉर्ड है।पिछले वर्षों के आंकड़े इस वर्ष की उपलब्धि को और स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं।
खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 13 जनवरी तक 17,49,003 किसानों से 72.15 एलएमटी धान खरीदा गया था और 13,550 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था। वर्ष 2021-22 में इसी अवधि तक 17,09,834 किसानों से 68.77 एलएमटी धान खरीदा गया था, जिसके बदले किसानों को 13,410 करोड़ रुपये मिले थे। वर्ष 2022-23 में 22,14,302 किसानों से 97.67 एलएमटी धान की खरीदी कर 20,022 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
इन सभी वर्षों की तुलना में वर्ष 2025-26 में 13 जनवरी तक ही 105.14 एलएमटी धान की खरीदी और 23,448 करोड़ रुपये के भुगतान के साथ राज्य ने नया उच्चतम स्तर छू लिया है। जहां 2020-21 में 72.15 एलएमटी, 2021-22 में 68.77 एलएमटी और 2022-23 में 97.67 एलएमटी धान खरीदा गया था, वहीं चालू खरीफ वर्ष में 13 जनवरी तक ही खरीदी 105.14 एलएमटी तक पहुँच चुकी है। किसानों को मिलने वाली राशि भी रिकॉर्ड स्तर पर है, जो सीधे बढ़कर 23,448 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।
सरकार का दावा है कि यह बढ़ोतरी पारदर्शी खरीदी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान प्रणाली और किसान-हितैषी नीतियों का परिणाम है। राज्य सरकार के अनुसार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिल रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। सरकार ने पुनः दोहराया है कि हर पात्र किसान से हर दाना धान खरीदा जाएगा और हर रुपये का भुगतान समय पर किया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ का किसान अधिक समृद्ध, आत्मनिर्भर और सुरक्षित बन सके।
भंडारण में अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान के भंडारण में सूखत (ड्रायज) और अनियमितताओं के मामलों में राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। जिन संग्रहण केन्द्रों में 0.5 प्रतिशत से अधिक और 1 प्रतिशत से कम कमी पाई गई, वहां केंद्र प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। 1 से 2 प्रतिशत तक कमी पाए जाने पर विभागीय जांच शुरू की गई, जबकि 2 प्रतिशत से अधिक कमी वाले केंद्र प्रभारियों को निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित की गई है और आपराधिक अनियमितता पाए जाने पर एफआईआर दर्ज की गई है।
पिछले दो वर्षों में धान खरीदी और भंडारण में अनियमितता तथा लापरवाही के मामलों में कुल 33 खाद्य निरीक्षकों और खाद्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। दो मामलों में संग्रहण केंद्र प्रभारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और एक केंद्र प्रभारी को निलंबित किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रति उसकी “शून्य सहनशीलता” नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में सूखत से जुड़े मामलों पर शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप 6 जिला विपणन अधिकारियों और 6 संग्रहण केंद्र प्रभारियों के विरुद्ध भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार के अनुसार यह पहल प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने और भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोकने की दिशा में निर्णायक कदम है।
केंद्रीय लक्ष्य, भंडारण और सूखत का संदर्भ
राज्य सरकार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा केंद्रीय पूल के लिए 78 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध लगभग 116 लाख मीट्रिक टन धान का निराकरण संभव हो पाया। शेष धान का निराकरण नीलामी के माध्यम से किया गया।
सरकार के अनुसार, केंद्रीय लक्ष्य के अनुरूप प्राप्त चावल की मिलिंग के दौरान भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास गोदाम क्षमता सीमित होने के कारण धान के अंतिम निराकरण में लगभग 12 से 15 माह का समय लग गया। लंबे समय तक स्टॉक रखने की स्थिति में संग्रहण केंद्रों में सूखत (ड्रायज) होना संभावित रहा।वर्तमान में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के अंतर्गत संग्रहण केन्द्रों में रखे धान का उठाव जारी है तथा ऑक्शन और नीलामी के माध्यम से बेचे गए धान का उठाव भी प्रक्रियाधीन है। सरकार का कहना है कि संपूर्ण धान निराकरण के बाद ही कुल सूखत का वास्तविक आंकलन किया जा सकेगा।
दायरा, लाभ और सरकार का संदेश
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018-19 में कुल 25.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 80.38 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में, सरकार के दावों के अनुसार, धान खरीदी का दायरा, खरीदी की मात्रा और किसानों को मिलने वाला प्रत्यक्ष लाभ – तीनों ही मानकों पर रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।राज्य सरकार का संदेश है कि किसानों के धन, अनाज और विश्वास से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। धान खरीदी, भुगतान, भंडारण और निराकरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीकी निगरानी के दायरे में रखा गया है, ताकि हर किसान को समय पर भुगतान और सुरक्षित व्यवस्था का लाभ मिल सके।



