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आर्थिक संकट के बीच वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी का बड़ा फैसला: वीआईपी काफिले को कहा ‘NO’, अब न्यूनतम संसाधनों में करेंगे काम

रायगढ़। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई ‘7 विशेष अपीलों’ का असर अब शासन के शीर्ष स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने प्रधानमंत्री के इस आह्वान को महज शब्दों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी कार्यशैली में उतारते हुए सादगी का एक बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है।

​उन्होंने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए यह घोषणा की है कि वे अब सुरक्षा संबंधी अत्यंत अनिवार्य परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी प्रकार की ‘पायलट’ या ‘फॉलो’ (VIP काफिले की) गाड़ियों का उपयोग नहीं करेंगे।

ईंधन की बचत और सादगी का कड़ा संदेश

​गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सात अहम मोर्चों पर जनता और जनप्रतिनिधियों से सहयोग माँगा है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा वीआईपी प्रोटोकॉल छोड़ने का यह साहसिक निर्णय सीधे तौर पर ईंधन की बचत और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अनावश्यक बोझ को कम करने से जुड़ा है।

​मंत्री श्री चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक वैश्विक और आर्थिक स्थितियां पूरी तरह सामान्य नहीं हो जातीं, वे न्यूनतम संसाधनों के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। उनका यह कदम वीआईपी कल्चर पर भी एक कड़ा प्रहार है।

सोशल मीडिया पर जनता कर रही है वाहवाही

​वित्त मंत्री के इस अहम फैसले की जानकारी जैसे ही सोशल मीडिया पर सामने आई, आम नागरिकों की ओर से व्यापक और सकारात्मक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। इंटरनेट यूजर्स उनके इस कदम को एक ‘जिम्मेदार और संवेदनशील जनप्रतिनिधि’ की सच्ची मिसाल बता रहे हैं। कमेंट सेक्शन में लोग न केवल इस फैसले की खुलकर सराहना कर रहे हैं, बल्कि देश और प्रदेश के अन्य माननीयों से भी इसी तरह की सादगी और मितव्ययिता अपनाने की अपील कर रहे हैं।

मौजूदा हालात में क्यों जरूरी है यह पहल?

​पश्चिम एशिया में चल रही युद्ध जैसी स्थिति और तेल सप्लाई चेन में मंडरा रहे जोखिम के कारण पूरी दुनिया में महंगाई का ग्राफ तेजी से बढ़ने का खतरा है। यह किसी से छिपा नहीं है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल (Crude Oil) विदेशों से ही खरीदता है, जिसके एवज में हमें अपनी विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा चुकाना पड़ता है।

​यदि देश का हर नागरिक और खासतौर पर हमारे जनप्रतिनिधि मिलकर इस तरह के आर्थिक अनुशासन का पालन करते हैं, तो इसका सीधा और सकारात्मक असर देश की मजबूत अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा स्वयं से शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में प्रशासनिक स्तर पर एक व्यापक और सकारात्मक बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

क्या हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वो 7 बड़ी अपीलें?

​वैश्विक संकट को देखते हुए देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए 7 प्रमुख कदम इस प्रकार हैं:

  • ईंधन का संयमित उपयोग: ट्रैफिक सिग्नल (रेड लाइट) या जाम में फंसने पर अपनी गाड़ी का इंजन तुरंत बंद करें, ताकि हर बूंद पेट्रोल-डीजल बचाया जा सके।
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग: अकेले यात्रा करने के लिए निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन (बस, ट्रेन, मेट्रो) का अधिक उपयोग करें या साथियों के साथ कारपूलिंग अपनाएं।
  • इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा: भविष्य की जरूरतों को देखते हुए और तेल आयात का बिल कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनी पहली पसंद बनाएं।
  • ‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local): दैनिक जीवन में विदेशी उत्पादों की जगह भारत में बनी स्वदेशी चीजों की खरीदारी करें, ताकि हमारी विदेशी मुद्रा देश में ही रहे।
  • घरेलू पर्यटन (देखो अपना देश): छुट्टियां बिताने के लिए महंगी विदेश यात्राओं पर विदेशी मुद्रा खर्च करने के बजाय, भारत के ही पर्यटन स्थलों का भ्रमण करें।
  • ऊर्जा संरक्षण: घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर बिजली की बर्बादी रोकें। प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल करें और जरूरत न होने पर उपकरण बंद रखें।
  • स्वस्थ और इको-फ्रेंडली जीवनशैली: बहुत कम दूरी तय करने के लिए बाइक या कार निकालने के बजाय साइकिल का उपयोग करें या पैदल चलने की आदत डालें, यह सेहत और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद है।