सरगुजा। सोशल मीडिया पर आपने सास-बहू की अनबन और झगड़ों के तो कई किस्से देखे होंगे, लेकिन इन दिनों एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जो हर किसी को भावुक कर रहा है। यह मामला एक बहू के उस संघर्ष का है, जिसने अपनी बुजुर्ग सास को महज 500 रुपए की वृद्धावस्था पेंशन दिलाने के लिए खुद की परवाह किए बिना 9 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया। यह घटना न सिर्फ सास-बहू के रिश्ते की एक नई और खूबसूरत मिसाल पेश कर रही है, बल्कि जमीनी स्तर पर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर रही है।
छलक पड़े बहू के आंसू, बताई मजबूरी
इस वायरल वीडियो के पीछे की सच्चाई दिल पसीजने वाली है। अपनी सास सोनवारी को लेकर बैंक पहुंची बहू सुखमनिया ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि उसकी सास को वृद्धावस्था पेंशन के रूप में 500 रुपए मिलते हैं। पहले बैंक का मित्र ‘तपेश’ यह पेंशन उनके घर तक पहुंचा दिया करता था, जिससे उन्हें काफी सहूलियत होती थी। लेकिन, अचानक उसने पैसे घर तक पहुंचाने से साफ इनकार कर दिया। मजबूरी में सुखमनिया को अपनी सास को लेकर 9 किलोमीटर दूर पैदल चलकर बैंक आना पड़ा। सुखमनिया का दर्द यहीं खत्म नहीं होता; उसने यह भी बताया कि उसकी सास को सिर्फ यह वृद्धावस्था पेंशन ही मिलती है, जबकि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ के लाभ से भी वे अब तक वंचित हैं।
बैंक प्रबंधन का अपना तर्क
जब इस पूरे मामले को लेकर नर्मदापुर सेंट्रल बैंक के मैनेजर मिर्जा अल्ताफ से सवाल किया गया, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। मैनेजर ने बताया कि मैनपाट इलाके में बुजुर्गों और असहाय लोगों की सुविधा के लिए घर तक पेंशन पहुंचाने की व्यवस्था है और इसके लिए 8 बैंक मित्र कार्यरत हैं।
उन्होंने कहा, “जिन हितग्राहियों को पेंशन निकालनी होती है, उनके परिजनों द्वारा हमें पूर्व सूचित कर दिया जाता है। सूचना मिलने के बाद हमारे बैंक मित्र उनके घर जाकर पैसे दे आते हैं। लेकिन, सोनवारी के परिवार की तरफ से हमें ऐसी कोई भी सूचना नहीं दी गई थी।”



