रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है, जो किसी का भी दिल दहला दे। टिकरापारा थाना क्षेत्र के संजय नगर में एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए खामोश हो गया। यहां एक किराए के मकान में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चों के शव मिले हैं। इस खौफनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
बंद दरवाजे के पीछे का खौफनाक मंजर
जानकारी के मुताबिक, यह परिवार पिछले आठ महीने से संजय नगर इलाके में किराए पर रह रहा था। परिवार के मुखिया 50 वर्षीय साजिद अली (उर्फ सज्जू) पुरानी बैटरियों की खरीद-बिक्री का काम करते थे। गुरुवार शाम के बाद से परिवार के किसी भी सदस्य को बाहर नहीं देखा गया। शुक्रवार देर रात जब बंद घर से तेज दुर्गंध आने लगी और रिश्तेदारों के फोन कॉल्स का कोई जवाब नहीं मिला, तो एक अन्य किरायेदार और मकान मालिक को अनहोनी की आशंका हुई।
उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का नजारा बेहद रुला देने वाला था। साजिद अली का शव फंदे से लटक रहा था, जबकि उनकी पत्नी राबिया बानो (45) और तीन बच्चों—इरशाद अली (20), शाहिदा बेगम (15) और मासूम इरशाबा परवीन (12)—के शव फर्श पर पड़े थे।
क्या पिता ने ही दिया जहर?
शुरुआती जांच में जो अंदेशा जताया जा रहा है, वह और भी पीड़ादायक है। पुलिस का मानना है कि संभवतः साजिद ने आत्महत्या करने से पहले अपनी पत्नी और तीनों बच्चों को जहर दिया होगा। हालांकि, एक पिता को ऐसा खौफनाक कदम उठाने के लिए किस मजबूरी ने विवश किया, यह अभी एक गहरा राज बना हुआ है।

रायपुर पश्चिम के एडिशनल डीसीपी राहुल देव शर्मा ने बताया, “पुलिस हर पहलू से मामले की बारीकी से जांच कर रही है। चारों शव जमीन पर पड़े मिले हैं और मुखिया का शव फंदे से लटका मिला है। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फोरेंसिक विश्लेषण और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असल वजह पूरी तरह साफ हो पाएगी।”
पीछे छूट गए कई सवाल
यह घटना सिर्फ एक परिवार के खत्म होने की खबर नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक गहरा सदमा है। याद दिला दें कि कुछ समय पहले पंजाब के मानसा जिले से भी बिल्कुल ऐसी ही एक दिल चीर देने वाली घटना सामने आई थी, जहां एक ही परिवार के चार लोगों के शव मिले थे।
आखिर ऐसी कौन सी हताशा या मजबूरी होती है जो इंसान को अपने ही परिवार को खत्म करने जैसे भयानक कदम उठाने पर मजबूर कर देती है? यह सवाल आज संजय नगर की उन खामोश गलियों में गूंज रहा है, जहां कल तक इस परिवार की चहल-पहल हुआ करती थी। पुलिस अब इस पूरी गुत्थी को सुलझाने में जुटी है।



