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इलाज या मौत का खेल? खरसिया में 22 वर्षीय युवक की संदिग्ध मौत, डॉक्टरों पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप..!

आक्रोशित परिजनों ने 4 घंटे तक अस्पताल में किया हंगामा, दोषी डॉक्टरों पर FIR और 1 करोड़ मुआवजे की मांग। एनेस्थीसिया को बताया जा रहा है मौत का कारण।

खरसिया/रायगढ़: सरकारी अस्पतालों की बदइंतजामी और लापरवाही की एक बेहद खौफनाक तस्वीर खरसिया के सिविल अस्पताल से सामने आई है। यहाँ पाइल्स (बवासीर) का सामान्य सा ऑपरेशन कराने आए 22 साल के एक स्वस्थ युवक की ऑपरेशन थिएटर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर गलत इंजेक्शन लगाने का सीधा आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और धरने पर बैठ गए।

खुद चलकर ऑपरेशन थिएटर गया था युवक, लौटकर आई लाश

मृतक के पिता राजन प्रसाद शर्मा ने रुंधे गले से बताया कि उनके 22 वर्षीय बेटे पदम शर्मा को बवासीर की समस्या थी। इसके इलाज के लिए वे बुधवार को उसे लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी, लेकिन उस दिन ऑपरेशन टालकर अगले दिन (गुरुवार) बुलाया गया। गुरुवार सुबह करीब 10 बजे पदम पूरी तरह से स्वस्थ हालत में खुद चलकर जांच के बाद ऑपरेशन थिएटर के अंदर गया था।

डेढ़ घंटे बाद डॉक्टर बोले- हालत गंभीर है, रायगढ़ ले जाओ

परिजनों का आरोप है कि पदम के अंदर जाने के करीब डेढ़ घंटे बाद नर्सिंग स्टाफ ने घबराहट में उन्हें अंदर बुलाया। अंदर गए तो डॉक्टर ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि युवक की हालत बिगड़ गई है, इसे तुरंत रायगढ़ रेफर किया जा रहा है। लेकिन परिजनों का कहना है कि तब तक पदम की सांसें थम चुकी थीं। जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

अस्पताल छावनी में तब्दील, 4 घंटे तक चला बवाल

युवक की मौत की खबर जंगल की आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते ग्रामीणों और परिजनों की भारी भीड़ अस्पताल में जुट गई। परिजनों ने 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और लापरवाह डॉक्टरों व कर्मचारियों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर करीब 4 घंटे तक अस्पताल के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। तनाव बढ़ता देख भारी पुलिस बल मौके पर तैनात करना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन भी तुरंत अलर्ट मोड में आ गया।

पोस्टमार्टम के लिए रायगढ़ से बुलाई गई स्पेशल टीम

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मामला संवेदनशील है, इसलिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के असली कारणों से पर्दा उठ सकेगा। इसके लिए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम पोस्टमार्टम के लिए खरसिया रवाना की गई है।

जिम्मेदारों का क्या कहना है?

“इलाज के दौरान एक युवक की मौत हुई है। परिजन गलत इलाज का आरोप लगाते हुए मुआवजे और स्टाफ पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। प्रशासन द्वारा लोगों को समझाइश दी गई है और आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।”

– प्रवीण तिवारी, एसडीएम

“ऑपरेशन के लिए मरीज को एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) दिया गया था। संभवतः मरीज का शरीर उसे बर्दाश्त नहीं कर पाया। स्थिति गंभीर होने पर उसे रेफर करने की तैयारी की जा रही थी।”

– डॉ. विक्रम सिंह राठिया, बीएमओ, सिविल अस्पताल खरसिया

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की कड़ी मशक्कत और समझाइश के बाद मामला शांत कराया गया है, लेकिन इलाके में भारी तनाव है। अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर उन दो घंटों में बंद दरवाजों के पीछे ऐसा क्या हुआ जिसने एक हंसते-खेलते जवान युवक की जिंदगी छीन ली।