जांजगीर । छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले के प्रशासनिक महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जल संसाधन विभाग के एक कार्यपालन अभियंता (EE) और सरकारी वाहन चालक के बीच तीखी नोकझोंक और गाली-गलौज का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। इस वायरल क्लिप ने न सिर्फ विभागीय समन्वय की पोल खोल दी है, बल्कि अधिकारियों के आचरण और मातहतों के प्रति उनके व्यवहार पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से जांच के आदेश दे दिए हैं।
क्या है वायरल ऑडियो का सच?
यह वायरल ऑडियो जल संसाधन विभाग के ईई शशांक सिंह और वाहन चालक शशिकांत साहू के बीच का बताया जा रहा है। बातचीत के दौरान ईई द्वारा कथित तौर पर जिस तरह की भद्दी और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उसने प्रशासनिक अमले को सकते में डाल दिया है। विवाद तब और तूल पकड़ गया जब ड्राइवर ने इस पूरी बातचीत को रिकॉर्ड कर सार्वजनिक कर दिया।
2022 के अटैचमेंट में फंसा पेंच, 5 महीने से पगार बंद
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2022 से जुड़ी हुई हैं। उस दौरान अकलतरा में एसडीएम कार्यालय की शुरुआत हुई थी और तत्कालीन एसडीएम ममता यादव के वाहन संचालन के लिए जल संसाधन विभाग (नरियरा) से चालक शशिकांत साहू को अटैच किया गया था। तब लिखित आदेश में तय हुआ था कि ड्राइवर सेवाएं एसडीएम ऑफिस में देगा, लेकिन उसका वेतन जल संसाधन विभाग से निकलेगा।
शुरुआत में व्यवस्था सुचारू रही, लेकिन हाल के महीनों में मूल विभाग ने ड्राइवर को वापस बुलाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। वहीं ड्राइवर का स्पष्ट कहना है कि वह लौटने को तैयार है, बशर्ते उसे एसडीएम कार्यालय से विधिवत कार्यमुक्त (Relieve) किया जाए। दो दफ्तरों के बीच आपसी तालमेल की इस भारी कमी का खामियाजा सीधे तौर पर ड्राइवर को भुगतना पड़ रहा है, जिसका पिछले पांच महीने से वेतन ही रोक दिया गया है।
आर्थिक तंगी की मार झेल रहा परिवार
लगातार पांच महीने से वेतन न मिलने के कारण ड्राइवर शशिकांत का परिवार भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। बच्चों की स्कूल फीस से लेकर घर के रोजमर्रा के खर्चों तक के लाले पड़े हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई भी जिम्मेदार इस समस्या का ठोस समाधान निकालने को तैयार नहीं दिखा।
विवाद के पीछे एक महिला कर्मचारी का भी जिक्र
विभागीय सूत्रों की मानें तो ईई के इस कदर भड़कने की इकलौती वजह सिर्फ अटैचमेंट नहीं है। बताया जा रहा है कि पूर्व में चालक पर विभाग की ही एक महिला अधिकारी और कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगे थे। इसी पुरानी बात को लेकर फोन पर दोनों के बीच बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते अपना स्तर खो बैठी और गाली-गलौज में तब्दील हो गई।
एक्शन में कलेक्टर, अपर कलेक्टर को सौंपी जांच
ऑडियो वायरल होते ही जिला प्रशासन फौरन हरकत में आ गया। कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए अपर कलेक्टर को विस्तृत जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्हें इस पूरे प्रकरण की हर एंगल से बारीकी से जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सिस्टम पर उठते सवाल
यह घटना सिस्टम की उस लालफीताशाही और लचर कार्यसंस्कृति का जीता-जागता उदाहरण है, जहां छोटे कर्मचारियों को दो विभागों की खींचतान के बीच पिसना पड़ता है। इसने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में अफसरशाही और कर्मचारी प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। अब देखना यह है कि जांच के बाद प्रशासन इस पर क्या कड़ा कदम उठाता है।



