गरियाबंद । छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में एक समाधान शिविर के दौरान उस वक्त सब सन्न रह गए, जब पीएम आवास की गुहार लगाते हुए एक बुजुर्ग दंपत्ति जिला पंचायत सीईओ के पैरों पर गिर पड़ा। बुजुर्ग के दंडवत होने का वीडियो सामने आते ही प्रदेश में सियासी बवाल मच गया। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए सत्तासीन विष्णुदेव साय सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
विपक्ष के तीखे हमलों और सोशल मीडिया पर वायरल होती तस्वीरों के बीच अब गरियाबंद जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले की वस्तुस्थिति स्पष्ट की है। प्रशासन ने साफ किया है कि आखिर इस बेबस दंपत्ति को अब तक पीएम आवास का लाभ क्यों नहीं मिल सका था।
ख़बर की मुख्य बातें:
- मामले में नया मोड़: गरियाबंद में बुजुर्ग दंपत्ति के दंडवत होने के मामले में प्रशासन ने रखा अपना पक्ष।
- क्या है सच्चाई: परिवार लंबे समय से छत्तीसगढ़ में नहीं, बल्कि ओडिशा में रह रहा था।
- सर्वे में क्यों छूटे: 2011, 2018 और 2024 के सर्वे के दौरान भी गांव में मौजूद नहीं था परिवार।
- त्वरित राहत: समाधान शिविर में ही हाथों-हाथ बनाया गया राशन कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड।
ओडिशा में रहता था परिवार, इसलिए छूटा नाम
इस भावुक कर देने वाले घटनाक्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने बताया कि जो हितग्राही समाधान शिविर में अपना आवेदन लेकर पहुंचे थे, वे विशेष पिछड़ी जनजाति से आते हैं। दरअसल, यह परिवार काफी लंबे समय से छत्तीसगढ़ में निवास ही नहीं कर रहा था। वे रोजी-रोटी या अन्य कारणों से ओडिशा चले गए थे और वहीं रह रहे थे।
यही वजह है कि जब प्रदेश में वर्ष 2011 और वर्ष 2018 में पीएम आवास के लिए सर्वे किया गया, तो गांव में अनुपस्थित होने के कारण इस परिवार का नाम सर्वे सूची में शामिल नहीं हो सका।
2024 के नवीन सर्वेक्षण में भी नहीं थे मौजूद
सीईओ चंद्राकर ने आगे बताया कि वर्ष 2024 में जब छत्तीसगढ़ शासन ने एक बार फिर नया सर्वेक्षण कराया, तब भी यह परिवार गांव में मौजूद नहीं था और ओडिशा में ही रह रहा था। यह परिवार कुछ ही दिन पहले वापस छत्तीसगढ़ लौटा है। वापस लौटने के बाद, प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए ‘पीएम जनमन योजना’ के तहत उनके परिवार का सर्वे पूरा कर लिया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कागजी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें आवास स्वीकृत कर दिया जाएगा।
शिविर में ही बने दस्तावेज, आयुष्मान की प्रक्रिया भी शुरू
चूंकि यह परिवार लंबे समय से ओडिशा में था, इसलिए उनके पास राशन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का भी अभाव था। समाधान शिविर में अधिकारियों ने संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए बुजुर्ग दंपत्ति का राशन कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड तत्काल मौके पर ही बनाकर उन्हें सौंप दिया। इसके अलावा, स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके ‘आयुष्मान कार्ड’ बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
हर कदम पर साथ है प्रशासन
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में सभी पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है। विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) बहुल इलाकों में, जो परिवार पहले सर्वे से छूट गए थे, उनका ‘पीएम जनमन’ के तहत दोबारा सर्वे कराकर सूची तैयार कर ली गई है। फिलहाल भारत सरकार से स्वीकृति का इंतजार है।
अधिकारियों ने बुजुर्ग दंपत्ति को ढांढस बंधाते हुए आश्वस्त किया है कि शासन-प्रशासन उनकी हर संभव मदद के लिए उनके साथ खड़ा है। इस स्पष्टीकरण के बाद यह तो साफ हो गया है कि सिस्टम की लापरवाही से ज्यादा, यह मामला परिवार के लंबे समय तक राज्य से बाहर रहने के कारण आई तकनीकी अड़चन का था, जिसे अब प्रशासन ने सुलझा लिया है।



