बिलासपुर। अपराधियों को केवल गिरफ्तार करना ही पुलिस की सफलता नहीं है, बल्कि उन्हें कोर्ट में पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सजा दिलाना असली लक्ष्य है। इसी विजन के साथ बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) श्री रामगोपाल गर्ग ने हत्या (Homicide) के मामलों की जांच के लिए एक नई और आधुनिक कार्ययोजना तैयार की है।
मंगलवार को आईजी कार्यालय में आयोजित एक विशेष वर्चुअल प्रशिक्षण सत्र में रेंज के एएसपी (ASP) से लेकर उपनिरीक्षक (SI) स्तर के अधिकारियों को ‘स्मार्ट विवेचना’ के गुर सिखाए गए।
124 बिंदुओं की चेकलिस्ट: अब गलती की कोई गुंजाइश नहीं
आईजी श्री गर्ग ने विवेचना में मानवीय त्रुटि को खत्म करने के लिए 124 बिंदुओं का एक कड़ा प्रोटोकॉल जारी किया है। अब से हत्या के हर केस की चार्जशीट (चालान) में इस चेकलिस्ट का पालन अनिवार्य होगा। इसमें एफआईआर दर्ज करने से लेकर न्यायालय में साक्ष्य पेश करने तक की हर प्रक्रिया का बारीकी से प्रलेखन (Documentation) किया जाएगा, ताकि बचाव पक्ष को किसी भी तकनीकी खामी का लाभ न मिल सके।
नए कानूनों और डिजिटल साक्ष्यों पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान आईजी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के नए प्रावधानों पर विशेष जोर दिया:
- ई-साक्ष्य (e-Sakshya) ऐप: धारा 105 के तहत अब हर जप्ती की वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी, ताकि गवाहों के मुकर जाने पर भी तकनीकी साक्ष्य प्रभावी रहें।
- डिजिटल फुटप्रिंट्स: अब विवेचक केवल गवाहों के भरोसे नहीं रहेंगे। आरोपियों के गूगल टेकआउट (Google Takeout), इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स की बारीकी से साइबर जांच की जाएगी।
- त्रिनयन ऐप और CCTV: घटनास्थल के 100 किमी के दायरे में लगे कैमरों की मैपिंग की जाएगी और सुरक्षित तरीके से फुटेज को केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा।
वैज्ञानिक साक्ष्य और ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व
आईजी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि घटनास्थल पर ‘गोल्डन ऑवर’ (शुरुआती समय) में ही घेराबंदी कर फोरेंसिक, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की मदद ली जाए।
- DNA प्राथमिकता: मृतक के नाखूनों में फंसे आरोपी की स्किन या संघर्ष के दौरान गिरे बालों जैसे डीएनए साक्ष्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
- रात्रिकालीन पोस्टमार्टम: संवेदनशील मामलों में पर्याप्त रोशनी और अनिवार्य वीडियोग्राफी के साथ रात में भी पोस्टमार्टम कराया जा सकेगा।
साप्ताहिक चलेगा प्रशिक्षण का दौर
इस प्रशिक्षण सत्र में मुंगेली एसएसपी श्री भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी जिलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। आईजी रामगोपाल गर्ग ने स्वयं पीपीटी (PPT) के माध्यम से विवेचना के ‘की-पॉइंट्स’ समझाए। उन्होंने घोषणा की है कि पुलिस अधिकारियों को आधुनिक अनुसंधान तकनीकों से अपग्रेड करने के लिए अब हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर ऐसे प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
“हमारा लक्ष्य त्रुटिहीन विवेचना है। अप्रैल 2026 के बाद होने वाले सभी हत्या के मामलों में नए वैज्ञानिक और तकनीकी प्रोटोकॉल का पालन होगा, ताकि अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसकर सख्त सजा दिलाई जा सके।”
— श्री रामगोपाल गर्ग, पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज



