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लाइव क्रिकेट में ‘5 सेकंड’ का खेल: सटोरियों को फायदा पहुंचाने वाला बी.टेक इंजीनियर साइबर पुलिस के हत्थे चढ़ा

रायगढ़, 7 जून 2026। अपराध के लिए जब तकनीकी दिमाग का इस्तेमाल होता है, तो सिंडिकेट भी हाईटेक हो जाते हैं। लेकिन रायगढ़ पुलिस की पैनी नजरों से ये ‘हाईटेक’ सटोरिये भी नहीं बच पाए। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP)  शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन अंकुश’ के तहत साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसी बड़ी कामयाबी हासिल की है, जिसने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी के काले कारोबार की कमर तोड़ दी है।

​पुलिस ने एक ऐसे 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को दबोचा है, जो टीवी प्रसारण से 5 सेकंड पहले क्रिकेट मैच का लाइव अपडेट देने वाली विशेष वेबसाइट बनाकर सट्टेबाजों को मोटा मुनाफा पहुंचा रहा था।

​ खबर की अहम बातें:

  • आरोपी: आदर्श कुमार केशरी (28 वर्ष), बी.टेक इंजीनियर।
  • प्लेटफॉर्म: Winbigpro नामक वेबसाइट का करता था तकनीकी संचालन।
  • कमीशन: सट्टेबाजी के काले कारोबार में मिलता था 20% का फिक्स कमीशन।
  • कार्रवाई: आईटी एक्ट और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज।

न्यू शंकरनगर में दबिश, भागने की कोशिश रही नाकाम

रायगढ़ पुलिस पिछले कुछ समय से ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क (जिसके तार कोलकाता और गोवा तक जुड़े थे) को नेस्तनाबूद करने में लगी है। इसी कड़ी में एएसपी अनिल सोनी और सीएसपी  मयंक मिश्रा द्वारा सिंडिकेट के पुराने लिंक्स खंगाले जा रहे थे।

तभी पुलिस को एक पक्की मुखबिरी मिली कि न्यू शंकरनगर इलाके में एक युवक घर बैठे हाई-एंड कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर के जरिए सट्टा आईडी ऑपरेट कर रहा है। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में टीम ने जब शीतला मंदिर के पास स्थित मकान में दबिश दी, तो युवक पुलिस को देखकर भागने लगा। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे धर दबोचा। पूछताछ में उसने अपना नाम आदर्श कुमार केशरी बताया। उसके पास से आईडी निर्माण और सट्टा संचालन से जुड़े कई इलेक्ट्रॉनिक सुराग मिले हैं।

दिल्ली की आईटी कंपनी का इंजीनियर, ‘5 सेकंड’ का मास्टरमाइंड

​आरोपी आदर्श कोई मामूली सटोरिया नहीं है, बल्कि उसने बी.टेक (इंजीनियरिंग) की पढ़ाई की है और वह दिल्ली की एक नामी आईटी कंपनी में काम कर चुका है।

​अक्टूबर 2025 में उसकी मुलाकात रायपुर और बिहार के दो दोस्तों से हुई जो नोएडा की आईटी कंपनियों में काम करते थे। वहीं से इस टेक-सिंडिकेट की शुरुआत हुई। आदर्श ने पुलिस को बताया कि उसने तकनीकी विलंब (Technical Lag) का फायदा उठाया। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जिसमें क्रिकेट मैच का लाइव प्रसारण टीवी से करीब 5 सेकंड पहले ही उनकी वेबसाइट पर आ जाता था। इसी 5 सेकंड के गैप का फायदा उठाकर सटोरिए ‘बॉल-टू-बॉल’ सट्टेबाजी में करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे थे।

ऐसे काम करता था पूरा सिंडिकेट

​यह गिरोह देश के अलग-अलग महानगरों के साथ-साथ रायपुर, भिलाई और बिलासपुर के सटोरियों को आईडी बेचता था। पुलिस की रडार से बचने के लिए ये लगातार वेबसाइट के डोमेन नेम, यूजर आईडी और पासवर्ड बदलते रहते थे। गिरोह ने बाकायदा अपनी कॉर्पोरेट स्टाइल में टीमें बांट रखी थीं— एक टीम सोशल मीडिया पर प्रमोशन करती, दूसरी आईडी बेचती और तीसरी तकनीकी काम देखती थी।

​आरोपी आदर्श सिर्फ आईडी ही नहीं बनाता था, बल्कि सटोरियों के पैसों के भुगतान और विड्रॉल (निकासी) का काम भी देखता था। इसके एवज में उसे पूरे मुनाफे का 20% हिस्सा मिलता था। पुलिस के मुताबिक, इसका मुख्य लैपटॉप (HP कंपनी) दिल्ली में छिपाकर रखा गया है, जिसकी बरामदगी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

महंगे मोबाइल जब्त, आरोपी भेजा गया जेल

​पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक सैमसंग S-23 और एक वनप्लस मोबाइल फोन जब्त किया है। आरोपी पर छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 4 एवं 7 तथा आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत साइबर थाना रायगढ़ में मामला दर्ज कर उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

​इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी विजय चेलक के साथ एएसआई नंदकुमार सारथी, ज्योत्सना शर्मा, प्रधान आरक्षक रूपराम पटेल, दुर्गेश सिंह, आरक्षक रविन्द्र गुप्ता, विकास प्रधान और मनोज पटनायक की बेहद अहम और सराहनीय भूमिका रही।