रिपोर्ट: विकास गुप्ता , लैलूंगा संवाददाता
लैलूंगा/रायगढ़। सरकारी खजाने को कैसे पलीता लगाया जाता है, इसकी जीती-जागती मिसाल लैलूंगा क्षेत्र में चल रहे केनाल लाइनिंग निर्माण कार्य में देखी जा सकती है। जल संसाधन विभाग की नाक के नीचे करोड़ों रुपये की लागत से बनी नहर की कांक्रीट 6 महीने भी नहीं टिक पाई। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जो काम कुछ महीने पहले ही पूरा हुआ था, वह अब जगह-जगह से दरकने और उखड़ने लगा है। अब अपनी नाकामी और कमीशनखोरी को छिपाने के लिए ठेकेदार और विभाग पैचवर्क (मरम्मत) का खेल खेल रहे हैं।
ग्राउंड जीरो का सच: पापड़ की तरह उखड़ रही कांक्रीट
लैलूंगा विकासखंड के जामबाहर, लैलूंगा, कुंजारा, रेंगड़ी, गोसाईडीह समेत कई गांवों से होकर गुजरने वाली इस केनाल का लाइनिंग कार्य पिछले एक साल से चल रहा है। शुरुआत से ही ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि घटिया सामग्री और तकनीकी मानकों की अनदेखी की शिकायत कर रहे थे। लेकिन जिम्मेदार विभाग ने आंखें मूंदे रखीं। नतीजा यह है कि आज लाखों-करोड़ों की लागत से बिछाई गई कांक्रीट दरक चुकी है।
भ्रष्टाचार को ‘सीमेंट’ से ढंकने की कोशिश
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जिन हिस्सों में नहर टूट चुकी है, वहां अब आनन-फानन में मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह मरम्मत नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की दरारों पर पर्दा डालने की कोशिश है। अगर निर्माण में सही तकनीकी मानकों का पालन हुआ होता, तो महज कुछ महीनों में नहर की यह दुर्दशा नहीं होती। यह साफ दर्शाता है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण और मॉनिटरिंग पूरी तरह से फेल रही है।

कुंभकर्णी नींद में अफसर और प्रशासन
- अधिकारियों की उदासीनता: इस मुद्दे को पहले भी प्रमुखता से उठाया जा चुका है, लेकिन जल संसाधन विभाग के अफसरों ने वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर मौके का मुआयना करना तक जरूरी नहीं समझा।
- जिला प्रशासन की खामोशी पर सवाल: लगातार शिकायतों के बाद भी जिला प्रशासन का रवैया ढुलमुल है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी आम आदमी का मामला होता तो तुरंत डंडा चल जाता, लेकिन जब मामला सरकारी फंड की बंदरबांट का है, तो सबने मौन साध लिया है। क्या निर्माण एजेंसी, इंजीनियरों और अफसरों के बीच कोई गहरी साठगांठ है?
जनता की मांग: उच्च स्तरीय तकनीकी जांच हो
लैलूंगा क्षेत्र के ग्रामीणों ने कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और राज्य शासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है।
- निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता की जांच हो।
- अब तक हुए भुगतान और वर्क ऑर्डर के दस्तावेजों का ऑडिट किया जाए।
- भ्रष्टाचार की पुष्टि होने पर दोषी अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो।



