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रायगढ़ के हौसलों ने फिर चूमा आसमान: पर्वतारोही याशी जैन के नेतृत्व में एवरेस्ट बेस कैंप पर शान से लहराया तिरंगा

काठमांडू/रायगढ़, 22 मई 2026: जब इरादे हिमालय जैसे बुलंद हों और हौसलों में तिरंगे की शान बसती हो, तो मौसम की दुश्वारियां और प्राणवायु (ऑक्सीजन) की कमी भी मायने नहीं रखती। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के साहसी सपूतों ने एक बार फिर इसे सच कर दिखाया है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्वतारोही याशी जैन के नेतृत्व में रायगढ़ के दो उत्साही मित्रों—अखिलेश जैन और मनोज सिंह—ने 22 मई की दोपहर 2 बजे, 5364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ‘एवरेस्ट बेस कैंप’ पर शान से तिरंगा फहराकर इतिहास के पन्नों में रायगढ़ का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा दिया है।

कठिन डगर और फौलादी इरादे

​इस ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाली यात्रा की शुरुआत 11 मई को रायगढ़ की माटी से हुई थी। वहां से काठमांडू पहुंचने के बाद, 13 मई से इन जांबाजों ने दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर की ओर अपनी कठिन चढ़ाई शुरू की।

करीब 60 किलोमीटर का यह ट्रेक किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती गई, हवा में ऑक्सीजन का स्तर गिरता गया और मौसम अपना रौद्र रूप दिखाने लगा। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और हर पल बदलते मौसम की अनिश्चितता के बावजूद, याशी जैन के कुशल मार्गदर्शन में इस टीम ने एक पल के लिए भी हार मानने का विचार नहीं किया। उनके कदम लगातार मंजिल की ओर बढ़ते रहे।

पिता-पुत्री और दोस्ती की अद्भुत मिसाल

​इस अभियान की सबसे भावुक और प्रेरणादायक बात यह रही कि टीम का नेतृत्व कर रहीं पर्वतारोही याशी जैन के साथ इस दुर्गम चढ़ाई को फतह करने वालों में स्वयं उनके पिता, श्री अखिलेश जैन शामिल थे।

  • अखिलेश जैन: स्थानीय पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत श्री जैन ने यह साबित कर दिया कि उम्र और व्यस्त दिनचर्या, रोमांच और जज्बे के आड़े नहीं आ सकती। एक पिता का अपनी बेटी के नेतृत्व में एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचना, अपने आप में एक अद्भुत और विरला उदाहरण है।
  • मनोज सिंह: अखिलेश जी के घनिष्ठ मित्र और जिंदल स्टील (JSPL) में कार्यरत मनोज सिंह ने भी अपनी अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए इस चुनौती को पार किया। इन दोनों मित्रों की जोड़ी ने साबित कर दिया कि सच्ची मित्रता हर मुश्किल राह को आसान बना देती है।

रायगढ़ के लिए गौरव का क्षण

​22 मई को दोपहर ठीक 2 बजे, जब इन रायगढ़वासियों ने एवरेस्ट बेस कैंप की बर्फीली चोटियों के बीच भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया, तो वह क्षण न केवल इन पर्वतारोहियों के लिए, बल्कि पूरे रायगढ़ और छत्तीसगढ़ प्रदेश के लिए असीम गर्व का था।