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कृत्रिम पैर ने लौटाई जिंदगी की रफ्तार: प्रशासन की पहल से बबीता के जीवन में लौटी नई उम्मीद

रायगढ़।  जिले के ग्राम मुरालपाली की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में छाए निराशा के घने बादल अब छंट चुके हैं, और उनकी जिंदगी की रफ्तार फिर से लौट आई है। एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद अपना बायां पैर गंवा चुकीं बबीता के लिए सामान्य जीवन जीना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया था। लेकिन, जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल और त्वरित सहयोग ने उन्हें कृत्रिम पैर उपलब्ध कराकर न सिर्फ नई उम्मीद दी, बल्कि उनका खोया हुआ आत्मविश्वास भी लौटा दिया है। आज वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर होकर एक नए उत्साह के साथ अपने दैनिक कार्य कर रही हैं।

​बबीता के जीवन में यह कठिन दौर पिछले वर्ष तब आया, जब एक घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। यह संक्रमण धीरे-धीरे हड्डियों तक फैल गया और चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद इसे नियंत्रित नहीं किया जा सका। अंततः 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस त्रासदी ने बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया था। अचानक आए इस ठहराव से उनका जीवन मानो रुक सा गया था, लेकिन इतनी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

​अपने जीवन को वापस पटरी पर लाने के लिए बबीता ने प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और जिला कलेक्टर के समक्ष कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता का निवेदन किया। उनकी पीड़ा को पूरी संवेदनशीलता के साथ समझते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की। इसके बाद रायपुर स्थित ‘इंडो लाइट्स’ संस्थान के समन्वय से उन्हें आधुनिक कृत्रिम पैर लगवाया गया। अब बबीता बेहद सहजता से चल-फिर रही हैं और पहले की तरह सामान्य जीवन जी रही हैं। भावुक बबीता ने आज अपर कलेक्टर से भेंट कर इस मानवीय पहल के लिए राज्य शासन, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और जिला प्रशासन का हृदय से आभार व्यक्त किया है।