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छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट : रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ समेत कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी

रायपुर: शनिवार की रात। लोग दिनभर की उमस और थकान के बाद सुकून की नींद की तैयारी कर ही रहे थे कि अचानक मौसम ने करवट ली। आसमान में काले घने बादल छाए और देखते ही देखते तेज बारिश का ऐसा दौर शुरू हुआ जिसने पूरी राजधानी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।

​महज आधे घंटे के भीतर बादलों ने 30 मिलीमीटर पानी शहर पर उड़ेल दिया। यह बारिश केवल पानी नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी भी साथ लेकर आई, जहां चंद मिनटों की झमाझम ने स्मार्ट सिटी की सड़कों को उफनती नदियों में तब्दील कर दिया।

​रात के अंधेरे में घरों में घुसा पानी, पॉश इलाकों का टूटा गुरूर

​रायपुर का टाटीबंध इलाका और कई निचली बस्तियां इस अचानक आई आफत का सबसे बड़ा शिकार बनीं। जब लोग सो रहे थे, तब बारिश का गंदा पानी उनकी दहलीज लांघकर कमरों तक पहुंच गया। रतजगा करते और बाल्टियों से घरों का पानी उलीचते लोगों की बेबसी इस बात की गवाही दे रही थी कि शहर ऐसे अचानक आए मानसून के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था।

​दिलचस्प बात यह रही कि बारिश ने अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं किया। शहर के जिन पॉश इलाकों की चौड़ी सड़कों पर महंगी गाड़ियां फर्राटे भरती हैं, वे भी घुटनों तक पानी में डूबी नजर आईं और लोगों को आवाजाही में भारी जद्दोजहद करनी पड़ी।

​खौफ के साए में आगामी 24 घंटे: 7 जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’

​हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं। आसमान में अब भी काले बादल डेरा डाले हुए हैं और मौसम विभाग (IMD) की चेतावनियों ने लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

  • ऑरेंज अलर्ट (भारी बारिश और आकाशीय बिजली का खतरा): कबीरधाम, बेमेतरा, राजनांदगांव, दुर्ग, रायपुर, बालोद और कांकेर। इन जिलों के लोगों को घरों में सुरक्षित रहने की सख्त हिदायत दी गई है।
  • येलो अलर्ट (मध्यम बारिश और बिजली गिरने की आशंका): बस्तर से लेकर सरगुजा तक—बलरामपुर, कोरिया, सूरजपुर, जशपुर, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़, मुंगेली और जांजगीर-चांपा में भी एहतियात बरतने को कहा गया है।

​शहर की आफत, किसानों के लिए ‘संजीवनी’

​शहरों में जहां यह बारिश ट्रैफिक जाम और जलभराव का कारण बनी है, वहीं गांवों की पगडंडियों पर इसका स्वागत किसी त्योहार की तरह हो रहा है। खेतों की सूखी दरारों में जैसे ही पानी की बूंदें पड़ीं, किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक लौट आई है।