रायगढ़/लैलूंगा: रायगढ़ जिले के सियासी गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख आदिवासी युवा चेहरे रवि भगत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। अपने जन्मदिन के खास मौके पर लिए गए इस अचानक फैसले ने प्रदेश की राजनीति में एक नई और गहरी चर्चा छेड़ दी है।
एक नजर में मुख्य बातें:
- इस्तीफे की वजह: रवि भगत ने पार्टी छोड़ने के पीछे ‘निजी कारणों’ का हवाला दिया है।
- पृष्ठभूमि: वे रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले झरण गांव के निवासी हैं और आदिवासी अंचल में उनकी गहरी पैठ मानी जाती है।
- संघर्ष के दिनों के सारथी: जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्हें भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष की अहम कमान सौंपी गई थी। उस दौरान उन्होंने युवाओं के मुद्दों को सड़क से लेकर गांव-गांव तक मुखरता से उठाया था।
हालिया दिनों में DMF के मुद्दे पर रहे थे मुखर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन और नए समीकरण बनने के बाद से रवि भगत संगठन की मुख्यधारा से कुछ अलग-थलग दिखाई दे रहे थे। लंबे समय से उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली थी। हालांकि, इसके बावजूद वे जन सरोकार के मुद्दों पर पीछे नहीं हटे।
हाल ही में उन्होंने रायगढ़ जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) और CSR फंड के सही उपयोग का मुद्दा पूरी ताकत से उठाया था। उनका स्पष्ट रुख था कि जिन गांवों से खनिज संपदा निकाली जा रही है, विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं का पहला हक उन्हीं प्रभावित गांवों का है, न कि सिर्फ जिला मुख्यालयों का। उनकी इस सक्रियता ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींचा था।
आगे क्या? टिकी हैं सबकी निगाहें
रवि भगत के इस अप्रत्याशित कदम से कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी नेता से नाराजगी या किसी नए राजनीतिक दल में शामिल होने का कोई संकेत नहीं दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या रायगढ़ का यह कद्दावर युवा नेता अब अपना ध्यान पूरी तरह से सामाजिक कार्यों पर केंद्रित करेगा, या फिर राजनीति की बिसात पर कोई नई और स्वतंत्र दिशा चुनेगा? रवि भगत का अगला कदम रायगढ़ ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी नए समीकरण तय कर सकता है।



