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जिंदल पैंथर सीमेंट प्लांट में दर्दनाक हादसा: सुरक्षा के दावों की खुली पोल, 40 फीट से गिरकर 23 वर्षीय युवा मजदूर की मौत

चंद रुपयों की खातिर बंगाल से आए एक परिवार का चिराग बुझ गया। बिना सेफ्टी बेल्ट काम करने को मजबूर था युवा मजदूर।

रायगढ़। रोजी-रोटी की तलाश में अपने घर-परिवार से सैकड़ों किलोमीटर दूर आए एक युवा मजदूर की जिंदगी, सुरक्षा में बरती गई लापरवाही की भेंट चढ़ गई। कोतरारोड थाना क्षेत्र स्थित जिंदल पैंथर सीमेंट प्लांट में शुक्रवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां 40 फीट की ऊंचाई से गिरकर 23 वर्षीय कारपेंटर की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मजदूरों की जान की कीमत और उनकी सुरक्षा (Industrial Safety) पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रोटी की जद्दोजहद और एक दर्दनाक अंत

​पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले (थाना सताड़ी) के ग्राम सिंदुरपुर-देवली का रहने वाला 23 वर्षीय शंकर हाजरा (पिता गुरुपदा हाजरा) पिछले एक साल से रायगढ़ में रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। वह प्लांट के लेबर क्वार्टर में रहता था और बीजीसी इंडिया (BGC India) ठेका कंपनी के तहत प्लांट में कारपेंटर का काम करता था। उम्र के जिस पड़ाव में युवा अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, उस उम्र में शंकर परिवार की जिम्मेदारियां उठा रहा था। लेकिन किसे पता था कि रायगढ़ की धरती पर उसका सफर इतनी जल्दी और इतनी क्रूरता से खत्म हो जाएगा।

लापरवाही बनी मौत का कारण: बिना सेफ्टी बेल्ट काम करने की मजबूरी

​मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे शंकर रोजमर्रा की तरह काम पर गया था। वह 40 फीट की खतरनाक ऊंचाई पर प्लाई बोर्ड फिक्स करने का काम कर रहा था। हैरत और अफसोस की बात यह है कि इतनी ऊंचाई पर काम करने के बावजूद, उसे सुरक्षा बेल्ट (Safety Belt) जैसी बुनियादी सुरक्षा तक मुहैया नहीं कराई गई थी।

​इसी दौरान प्लाई बोर्ड फिक्स करते वक्त शंकर का पैर फिसला और वह अनियंत्रित होकर सीधे जमीन पर आ गिरा। सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। खून से लथपथ शंकर को देख साथी मजदूरों के बीच चीख-पुकार मच गई।

अस्पताल में तोड़ा दम, पुलिस कर रही जांच

​हादसे के बाद साथी श्रमिकों ने आनन-फानन में उसे तत्काल डॉ. आरएल अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन मौत से लड़ते-लड़ते रात करीब 1 बजे इस युवा ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं। शनिवार सुबह अस्पताल से मिली सूचना पर कोतवाली पुलिस ने शून्य में मर्ग कायम कर लिया है और पोस्टमार्टम के बाद शव उसके रोते-बिलखते परिजनों को सौंप दिया गया है।

मजदूरों का दर्द: “हमारी जान से हो रहा है खिलवाड़”

​अस्पताल के बाहर खड़े अन्य श्रमिकों की आंखों में शंकर को खोने का दुख भी था और प्रबंधन के प्रति भारी आक्रोश भी। साथी मजदूरों ने भारी मन से बताया कि जिस जगह काम चल रहा है, वहां ऊंचाई बहुत ज्यादा है, लेकिन वहां सुरक्षा के नाम पर व्यवस्थाएं सिफर हैं।

​पेट की आग और रोजगार छिन जाने का डर इन गरीब मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के भी अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने को मजबूर करता है। शंकर की मौत कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है, जो चंद रुपयों का मुनाफा बचाने के लिए मजदूरों की जान से खिलवाड़ कर रहा है।