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अडानी पावर प्लांट के पास मौत का तांडव: क्या औद्योगिक विकास की कीमत चुका रहे हैं स्थानीय ग्रामीण?

तेज रफ्तार ट्रेलर ने ली युवक की जान, कॉर्पोरेट लापरवाही के खिलाफ सड़क पर उतरा पूरा गांव, शव रखकर किया भारी चक्काजाम

रायगढ़।  क्या बड़े कॉर्पोरेट घरानों के लिए स्थानीय ग्रामीणों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है? रायगढ़ में अडानी पावर प्लांट के इर्द-गिर्द मंडराते मौत के साये ने आज एक और हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। प्लांट के पास एक बेलगाम और तेज रफ्तार ट्रेलर ने एक युवक को बेरहमी से कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने अडानी समूह के प्रबंधन, सड़क सुरक्षा के खोखले दावों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना के मुख्य बिंदु:

  • मृतक की पहचान: शंकर निषाद, निवासी ग्राम तपरदा (पावर प्लांट के समीप)।
  • घटनास्थल: अडानी पावर प्लांट के ठीक पास।
  • हादसे का कारण: प्लांट के काम में लगे भारी वाहनों (ट्रेलर) की तेज और बेलगाम रफ्तार।
  • वर्तमान स्थिति: आक्रोशित ग्रामीणों द्वारा शव को सड़क पर रखकर अनिश्चितकालीन चक्काजाम। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात।

सवालों के घेरे में अडानी समूह का प्रबंधन

​यह कोई पहली बार नहीं है जब औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास इस तरह के दर्दनाक हादसे हुए हों, लेकिन अडानी पावर प्लांट के पास हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।

  • सुरक्षा मानकों की अनदेखी: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्लांट से जुड़े भारी वाहन बिना किसी स्पीड लिमिट और सुरक्षा नियमों के सड़कों पर दौड़ते हैं। क्या अडानी प्रबंधन अपने ठेकेदारों और ट्रांसपोर्टर्स पर कोई नियंत्रण नहीं रखता?
  • पैदल चलना भी हुआ मुहाल: मृतक शंकर निषाद किसी काम से पैदल ही प्लांट की तरफ जा रहा था। क्या इस ‘विकास’ के मॉडल में स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित पैदल चलने की जगह भी नहीं बची है?
  • कॉर्पोरेट की चुप्पी: घटना के बाद से ही ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है, लेकिन इतनी बड़ी कॉर्पोरेट संस्था की तरफ से ग्रामीणों की सुरक्षा और ऐसे हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस पहल जमीन पर नजर नहीं आती।

आक्रोशित ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सड़क बनी छावनी

​हादसे की खबर जंगल में आग की तरह फैली और देखते ही देखते तपरदा और आसपास के गांवों की भीड़ घटनास्थल पर उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने अपने बेटे का शव सड़क के बीचों-बीच रखकर जोरदार चक्काजाम कर दिया है।

  • मुआवजे और न्याय की मांग: ग्रामीण सिर्फ मुआवजे की ही मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका सीधा सवाल है कि उनके गांवों के बीच से गुजरने वाले इन ‘मौत के ट्रेलरों’ पर लगाम कब लगेगी?
  • पुलिस प्रशासन के छूटे पसीने: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारी पुलिस बल मौके पर तैनात है। पुलिस अधिकारी लगातार ग्रामीणों को समझाइश देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जब तक अडानी प्रबंधन और प्रशासन कोई ठोस लिखित आश्वासन और उचित मुआवजा नहीं देता, यह चक्काजाम नहीं खुलेगा।