रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और गतिशील बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने प्राशसनिक सेवा (SAS) के 83 अधिकारियों को एक साथ बड़ी सौगात देते हुए उनके प्रमोशन और उच्च वेतनमान के आदेश जारी कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी इस आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हर्ष का माहौल है।
इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत डिप्टी कलेक्टर स्तर के 43 अधिकारियों को वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान (लेवल-13) और संयुक्त कलेक्टर स्तर के 40 अधिकारियों को प्रवर श्रेणी वेतनमान (लेवल-14) का लाभ प्रदान किया गया है।
43 डिप्टी कलेक्टरों की पदोन्नति, कार्यकुशलता को मिला सम्मान
प्रशासन द्वारा जारी पहली सूची के अनुसार, कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान (लेवल-12) में अपनी सेवाएं दे रहे 43 डिप्टी कलेक्टरों को उनकी पात्रता तिथि के आधार पर वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान (लेवल-13) में प्रमोट किया गया है। इन अधिकारियों ने विभिन्न जिलों में जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कार्य किया है, जिसके परिणामस्वरूप इन्हें यह पदोन्नति सौंपी गई है।
इस सूची के प्रमुख नाम:
पदोन्नत होने वाले प्रमुख अधिकारियों में बिलासपुर की डिप्टी कलेक्टर रजनी भगत, बलौदाबाजार-भाटापारा के अरुण कुमार सोनकर, महासमुंद के आशीष कर्मा, जशपुर के प्रशांत कुमार कुशवाहा, राजनांदगांव के गौतम चंद पाटिल, कोरिया के उमेश कुमार पटेल, गरियाबंद के विशाल कुमार महाराणा और नारायणपुर के सुमित कुमार गर्ग समेत कुल 43 जांबाज अधिकारी शामिल हैं।
40 वरिष्ठ अधिकारियों को प्रवर श्रेणी वेतनमान का लाभ
सरकार द्वारा जारी दूसरे आदेश में प्रशासनिक अनुभव को तवज्जो देते हुए वरिष्ठ श्रेणी वेतनमान (लेवल-13) में कार्यरत 40 अधिकारियों को प्रवर श्रेणी वेतनमान (लेवल-14) का लाभ दिया गया है। इस सूची में संयुक्त कलेक्टर, अवर सचिव, आयुक्त और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में तैनात शीर्ष अधिकारी शामिल हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों की सूची में ये नाम प्रमुख:
उच्च वेतनमान प्राप्त करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में संयुक्त कलेक्टर सिल्ली थॉमस, दिलेराम डाहिरे, स्निग्धा तिवारी, मनीष साहू, अभिषेक दीवान, रवि सिंह और नंद कुमार चौबे जैसे नाम शामिल हैं। इन अधिकारियों के पास लंबा प्रशासनिक अनुभव है, जिसका लाभ राज्य के विकास कार्यों को मिल रहा है।
शासन के इस फैसले के मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार के इस फैसले से न केवल अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि जिला प्रशासनों में काम की गति भी तेज होगी। आगामी समय में इन अधिकारियों को नई और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर और अधिक पारदर्शिता व मजबूती के साथ लागू किया जा सकेगा।
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