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Video : रायगढ़ में नहीं थम रहा हाथियों की मौत का सिलसिला: मांड नदी में डूबने से एक और शावक की जान गई, वन विभाग पर उठे गंभीर

रायगढ़ : रायगढ़ जिले में हाथियों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। करोड़ों रुपये के बजट और वन्यजीव संरक्षण के बड़े-बड़े दावों के बीच, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गया है। ताजा मामला रायगढ़ वन मंडल के खरसिया रेंज का है, जहां मांड नदी के गुर्दा क्षेत्र में पानी में डूबने से एक और हाथी शावक की दर्दनाक मौत हो गई है।

​लगातार हो रही इन मौतों ने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है।

सुबह 9 बजे ग्रामीणों ने देखा शव

मिली जानकारी के मुताबिक, आज सुबह करीब 9 बजे स्थानीय ग्रामीणों की नजर मांड नदी में तैरते एक हाथी के बच्चे के शव पर पड़ी। इसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और कड़ी मशक्कत के बाद शावक के शव को नदी से बाहर निकाला गया।

​बताया जा रहा है कि गुर्दा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में इन दिनों लगभग 50 हाथियों का एक बड़ा दल विचरण कर रहा है। ऐसे में यह शावक इस दल से कैसे बिछड़ा और नदी में कैसे डूबा, यह जांच का विषय है।

पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट होगा मौत का असली कारण

प्रारंभिक तौर पर वन विभाग के अधिकारी शावक की मौत का कारण पानी में डूबना मान रहे हैं। हालांकि, विभाग का कहना है कि पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने और विस्तृत जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जा सकेगी। फिलहाल वन विभाग की टीम मौके पर मौजूद है और आस-पास के इलाके की सर्चिंग की जा रही है।

आंकड़े जो वन प्रबंधन की पोल खोलते हैं

रायगढ़ जिला पिछले कुछ समय से हाथियों के संरक्षण के मामले में पूरी तरह से नाकाम साबित होता दिख रहा है। यह घटना कोई इकलौता मामला नहीं है।

आखिर कहां हो रही है चूक?

इतनी बड़ी संख्या में हाथी शावकों की मौत कोई सामान्य बात नहीं है। यह वन प्रबंधन व्यवस्था और हाथियों की ट्रैकिंग सिस्टम पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करती है। जब हाथियों के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए विभाग के पास अमला और तकनीक दोनों हैं, तो फिर शावक नदी या गड्डों में गिरकर कैसे मर रहे हैं? क्या जमीनी स्तर पर गश्त सिर्फ कागजों में हो रही है? ‘रायगढ़ सृष्टि’ वन विभाग के आला अधिकारियों से यह सवाल पूछता है कि आखिर इन बेजुबानों की लगातार हो रही मौतों का जिम्मेदार कौन है?