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तत्कालीन TI जितेंद्र एसैया की अचूक तफ्तीश का असर: जमीन की खातिर भतीजे को तीरों से बींधने वाले हत्यारे ताऊ को उम्रकैद

घरघोड़ा : न्याय के मंदिर से एक बार फिर यह कड़ा संदेश गया है कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, अगर पुलिस की विवेचना सटीक हो तो अपराधी कानून के फंदे से बच नहीं सकता। घरघोड़ा के बहुचर्चित पूरन सिंह राठिया हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा की अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए, सगे भतीजे की तीर-धनुष से निर्मम हत्या करने वाले आरोपी कंवर सिंह राठिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस पूरे मामले में तत्कालीन थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार एसैया की वैज्ञानिक और जमीनी विवेचना ने आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

जमीन की रंजिश में खून का प्यासा हुआ ताऊ

मामले की पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने घटना का रोंगटे खड़े कर देने वाला विवरण अदालत के सामने रखा। यह खौफनाक वारदात 28 अक्टूबर 2020 की है। ग्राम कया निवासी आरोपी कंवर सिंह राठिया का अपने ही भतीजों के साथ जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी रंजिश में इंसानियत इस कदर अंधी हुई कि बड़े पिता (ताऊ) ने अपने ही भतीजे पूरन सिंह की जान लेने की खौफनाक साजिश रच डाली।

​दोपहर करीब 3 बजे जब मृतक पूरन सिंह राठिया अपने बड़े भाई (सूचनकर्ता) राम प्रसाद, गांव के संतोष और होम राठिया के साथ खेत से धान का बंडल ट्रैक्टर-ट्रॉली में लोड कर घर लौट रहा था, तब उसे अंदाजा भी नहीं था कि मांझी डोंगरी के जंगल में मौत घात लगाए बैठी है।

फ़िल्मी अंदाज़ में किया था जानलेवा एम्बुश

जैसे ही ट्रैक्टर मांझी डोंगरी की चढ़ाई पर पहुंचा और रफ्तार धीमी हुई, जंगल में पहले से तीर-धनुष और टांगी लेकर छिपे कंवर सिंह ने हमला कर दिया। उसने सीधे ट्रॉली पर बैठे अपने छोटे भाई के बेटे पूरन सिंह को निशाना बनाया और एक के बाद एक तीन तीर दागे। तीर पूरन की गर्दन, छाती और भुजा को बुरी तरह चीरते हुए धंस गए।

​इस खौफनाक और अचानक हुए हमले से वहां दहशत फैल गई। संतोष चिल्लाते हुए ट्रैक्टर से कूदकर भागा। हत्यारे के इरादे भांपकर राम प्रसाद और ओम राठिया भी किसी तरह जान बचाकर गांव की तरफ भागे और ग्रामीणों को सूचना दी। जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचते, तीरों से छलनी पूरन सिंह ट्रॉली पर ही दम तोड़ चुका था।

टी.आई. एसैया की मजबूत चार्जशीट बनी फांसी का फंदा

मृतक के बड़े भाई राम प्रसाद की रिपोर्ट पर थाना घरघोड़ा में अपराध क्रमांक 254/2020 दर्ज किया गया। उस वक्त के थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार एसैया ने खुद इस जघन्य हत्याकांड की विवेचना की कमान संभाली। उन्होंने हत्या में प्रयुक्त हथियार, मौका-ए-वारदात के सुराग और गवाहों के बयानों को इतनी बारीकी से संकलित किया कि बचाव पक्ष के पास कोर्ट में कोई रास्ता नहीं बचा। उनकी इसी अभेद्य विवेचना और धारा 302 के तहत पेश मजबूत चार्जशीट के आधार पर अदालत में मामला आईने की तरह साफ हो गया।

आश्रितों को एक लाख रुपए की क्षतिपूर्ति

सभी गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विद्वान न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने कंवर सिंह राठिया को धारा 302 के तहत दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

​इस फैसले का एक मानवीय पहलू यह भी रहा कि माननीय न्यायालय ने मृतक के वारिसों और आश्रितों के दर्द को समझते हुए, विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के माध्यम से उन्हें 1,00,000/- (एक लाख रुपए) की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान किए जाने की अनुशंसा भी की है। शासन की ओर से इस पूरे मामले की सफल और प्रभावी पैरवी अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने की।