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रायगढ़ पुलिस का ‘एक्शन मोड’: एसएसपी शशि मोहन सिंह की क्राइम मीटिंग में कड़े निर्देश, “अपराधियों पर कसें नकेल, वरना खैर नहीं”

रायगढ़, 9 मई 2026। जिले में कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने और अपराधियों में खौफ पैदा करने के मकसद से रायगढ़ पुलिस अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। आज वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह ने पुलिस कंट्रोल रूम में एक मैराथन क्राइम मीटिंग ली। इस बैठक में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों से लेकर थाना, चौकी और शाखा प्रभारियों के कामकाज की गहन समीक्षा की गई। एसएसपी का सीधा और सख्त संदेश था— लंबित मामलों को जल्द सुलझाएं और सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी (विजुअल पुलिसिंग) हर हाल में दिखनी चाहिए।

​मीटिंग को सुव्यवस्थित रखने के लिए इसे तीन चरणों में बांटा गया था। पहले चरण में रायगढ़ अनुभाग, दूसरे में धरमजयगढ़ व खरसिया और तीसरे चरण में जिला पुलिस की विभिन्न शाखाओं का रिपोर्ट कार्ड परखा गया।

‘ऑपरेशन तलाश’ और ‘ऑपरेशन आघात’ पर खास जोर

लंबित गंभीर अपराधों को लेकर एसएसपी खासे सख्त नजर आए। उन्होंने साफ किया कि फरार अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ‘ऑपरेशन तलाश’ के तहत ऐसे आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष टीमें अब दूसरे राज्यों में भी दबिश देंगी। वहीं, नशे के खिलाफ चल रहे ‘ऑपरेशन आघात’ को लेकर कड़े निर्देश दिए गए कि पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले गांजे की तस्करी पर पूरी तरह से ब्रेक लगना चाहिए। जिले के किसी भी थाने की सीमा से गांजे की खेप पार नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा ‘ऑपरेशन अंकुश’ के तहत ऑनलाइन सट्टेबाजों पर भी पुलिस का प्रहार लगातार जारी रहेगा।

ढाबों और धर्मकांटों की आड़ में पनपते अवैध धंधों पर गिरेगी गाज

ग्राउंड लेवल पुलिसिंग को लेकर एसएसपी ने सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि उनके इलाकों में स्थित ढाबों और धर्मकांटों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। ढाबों में अवैध शराब की बिक्री और धर्मकांटों की आड़ में कबाड़ के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं। पारदर्शिता के लिए अब ढाबों पर संबंधित थाना प्रभारी का मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लिखा होना चाहिए। इलाके के सक्रिय और निष्क्रिय बदमाशों का फिर से सत्यापन कर उन्हें ‘ए, बी और सी’ कैटेगरी में बांटने का काम भी शुरू होगा, ताकि उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

सड़कों पर दिखे पुलिस, आम जनता में जगे विश्वास

एसएसपी ने ‘विजुअल पुलिसिंग’ को पुलिस की सबसे अहम कड़ी बताया। उनका कहना था कि प्रमुख चौराहों, बाजारों, ढाबों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की पेट्रोलिंग, फ्लैग मार्च और बीट सिस्टम लगातार दिखना चाहिए। इससे आम आदमी खुद को सुरक्षित महसूस करेगा और असामाजिक तत्वों में खाकी का खौफ बना रहेगा। सीएसपी और एसडीओपी को अपराध सुलझाने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी सौंपते हुए थाना प्रभारियों को पेंडिंग केस जल्द निपटाने का अल्टीमेटम दिया गया है।

साइबर फ्रॉड, महिला सुरक्षा और पुलिस का मानवीय चेहरा

अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सामुदायिक पुलिसिंग को भी धार देने को कहा गया है। थानों को साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, ट्रैफिक जागरूकता और नशा मुक्ति के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि बेहतरीन काम करने वाले पुलिसकर्मियों की पीठ थपथपाई जाएगी, लेकिन जिनकी शिकायतें मिलेंगी, उन पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी तय है।