रायगढ़। रायगढ़ जिला मुख्यालय से सटे औद्योगिक क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर फैलाए जा रहे प्रदूषण के खिलाफ अब स्थानीय नागरिकों ने मोर्चा खोल दिया है। क्षेत्र में संचालित ‘सिंघल स्टील कंपनी’ द्वारा पिछले कई वर्षों से लगातार उत्सर्जित किए जा रहे फ्लाईएश (राख) को लेकर पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का एक गंभीर मामला सामने आया है।
कंपनी प्रबंधन द्वारा सुनियोजित तरीके से नियमों के विपरीत जाकर फ्लाईएश का एक कृत्रिम पहाड़ निर्मित कर दिया गया है। इस अवैध कृत्य और इससे उत्पन्न होने वाले जानलेवा प्रदूषण के खिलाफ क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने लामबंद होकर क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी (रायगढ़, छ.ग.) को एक लिखित शिकायत सौंपते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई करने और इस राख के पहाड़ को हटाने की मांग की है।
जंगलों, वन्य प्राणियों और प्राकृतिक जलस्रोतों पर संकट
क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी को सौंपे गए पत्र के अनुसार, सिंघल स्टील से निकलने वाली भारी मात्रा में फ्लाईएश न सिर्फ हवा में जहर घोल रही है, बल्कि इससे लगे हुए वन परिक्षेत्र और वन्य प्राणियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। उद्योग से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट, फ्लाईएश और फैक्टरी का गंदा पानी बहकर सीधे आसपास के जंगलों में समा रहा है। इस वजह से न सिर्फ बेशकीमती वन संपदा नष्ट हो रही है, बल्कि क्षेत्र के प्राकृतिक जलस्रोत भी पूरी तरह दूषित और जहरीले हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस प्रदूषण के कारण क्षेत्र से कई प्रजातियों के पशु-पक्षी भी धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहे हैं।
घर-घर फैल रही बीमारियां: दमा, खांसी और आंखों में जलन
इस जानलेवा फ्लाईएश डंपिंग का सबसे भीषण और विपरीत प्रभाव स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ज्ञापन सौंपने पहुंचे आवेदकों ने बताया कि कंपनी से लगातार उड़ने वाली राख और जहरीले धुएं (डस्ट) के कारण वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। क्षेत्र के गांवों और बस्तियों में लोग दमा (अस्थमा), लगातार खांसी, सर्दी-जुकाम और आंखों में तेज जलन जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों का सांस लेना दूषित हवा के कारण दूभर हो गया है।
पूर्व की शिकायतों पर प्रशासन मौन, ‘एम.एस.पी. स्टील’ पर भी नहीं हुई कार्रवाई
शिकायतकर्ताओं ने पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया है कि इससे पूर्व में भी उनके द्वारा ‘एम.एस.पी. स्टील एण्ड पॉवर लिमिटेड कंपनी’ द्वारा निर्मित किए गए फ्लाईएश के कृत्रिम पर्वत को हटाने के लिए बाकायदा आवेदन दिया जा चुका है। लेकिन विडंबना यह है कि लंबे समय बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा आज दिनांक तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन की इसी निष्क्रियता के कारण उद्योगपतियों के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार पर्यावरण नियमों को ठेंगा दिखा रहे हैं।
चरणबद्ध उग्र जन आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि वायु, जल और जंगल को पूरी तरह नष्ट कर रहे इस गंभीर प्रदूषण के निदान हेतु प्रशासन ने तुरंत सख्त और ठोस कदम नहीं उठाए, और सिंघल स्टील के इस अवैध फ्लाईएश पहाड़ को तत्काल नहीं हटाया गया, तो क्षेत्र की जनता चुप नहीं बैठेगी। नागरिकों ने आने वाले दिनों में प्रशासन के खिलाफ चरणबद्ध जन आंदोलन शुरू करने की दोटूक चेतावनी दी है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पर्यावरण विभाग और स्थानीय प्रशासन की होगी।
इस शिकायत पत्र को सौंपने वालों में मुख्य रूप से आवेदक अमर सिंह राजपूत (मो. नं. 9399293943) सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक जैसे गोवर्धन राठौर, राहुल सिंह, अभिषेक शर्मा, देव सेठी, अंजू मिश्रा, यश सिंह व अन्य ग्रामीण शामिल रहे।




