रायगढ़। औद्योगिक जिला रायगढ़ धीरे-धीरे राख के ढेर पर बैठता जा रहा है। पर्यावरण को बचाने के लिए छग पर्यावरण संरक्षण मंडल (सीईसीबी) ने जो नियम बनाए हैं, उद्योग उसे ठेंगा दिखा रहे हैं। ताजा मामला फ्लाई एश (राखड़) के अवैध परिवहन और डंपिंग का है। प्रशासन की आंखों में धूल झोंकते हुए पावर प्लांट बिना ‘आईडब्ल्यूएमएमएस’ (IWMMS) पोर्टल में एंट्री किए ही धड़ल्ले से राखड़ खपा रहे हैं। हालांकि, विभाग ने अब सख्ती दिखाते हुए चोरी-छिपे एश डंप कर रहे बीएस स्पंज, अंजनी स्टील और टीआरएन एनर्जी जैसे उद्योगों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया है।
पावर प्लांटों से निकलने वाले बेहिसाब फ्लाई एश के निष्पादन पर पैनी नजर रखने के लिए ही आईडब्ल्यूएमएमएस पोर्टल तैयार किया गया था। नियम बिल्कुल साफ है— किसी भी प्लांट से राखड़ की गाड़ी डिस्पैच होने से पहले उसकी पूरी जानकारी पोर्टल पर दर्ज होनी चाहिए। वाहन में जीपीएस (GPS) लगा होना अनिवार्य है ताकि उसकी लाइव लोकेशन ट्रेस की जा सके। इसके बिना राखड़ का एक कण भी प्लांट से बाहर नहीं जा सकता। लेकिन मुनाफे की अंधी दौड़ में उद्योग इस सिस्टम को दरकिनार कर रहे हैं।
पकड़ी गई चोरी, इन उद्योगों पर लगा जुर्माना
पर्यावरण विभाग की हालिया जांच और कार्रवाई में तीन बड़े मामले सामने आए हैं, जहां बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं:
- बीएस स्पंज (तराईमाल): यहां से निकली गाड़ी (CG 13 AN 2912) की पोर्टल में कोई एंट्री नहीं थी। कागजों (पर्ची) में लोकेशन गेरवानी की दिखाई गई, जबकि हकीकत में राखड़ को अवैध रूप से घरघोड़ा भेजा जा रहा था। इस भारी हेराफेरी पर विभाग ने बीएस स्पंज पर 48,525 रुपये का जुर्माना ठोका है।
- अंजनी स्टील लिमिटेड: इस प्लांट के वाहन (CG 12 S 4188) में भी बिना पोर्टल एंट्री के राखड़ ढोई जा रही थी। हद तो तब हो गई जब गाड़ी के ऊपर तिरपाल तक नहीं ढंका था, जो कि बेसिक प्रोटोकॉल है। नियमों की इस खुली अनदेखी पर अंजनी स्टील पर 31,755 रुपये की क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है।
- टीआरएन एनर्जी: इस प्लांट की गाड़ी (CG 11 BN 9851) बिना तिरपाल के रास्ते भर राखड़ सड़क पर उड़ाते हुए जा रही थी। इससे आसपास के पूरे इलाके में भयंकर वायु प्रदूषण फैल रहा था और लोगों का सांस लेना मुहाल था। शिकायत मिलने पर जब जांच हुई तो एसओपी (SOP) के घोर उल्लंघन के आरोप में टीआरएन एनर्जी पर 62,310 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
कैसे निपटेंगे इस भयावह समस्या से?
चालान और जुर्माने की कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रायगढ़ का भविष्य क्या होगा? आने वाला समय रायगढ़ के लिए किसी भयावह सपने से कम नहीं है। जिले में कोयला और बिजली उत्पादन की क्षमता जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही ज्यादा मात्रा में फ्लाई एश का जहर उत्सर्जित हो रहा है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल छह उद्योगों का 5 करोड़ टन (लीगेसी फ्लाई एश) पहले से ही डंप पड़ा हुआ है। यह किसी पहाड़ से कम नहीं है। इसके अलावा, हर साल डेढ़ करोड़ टन नई राखड़ पैदा हो रही है।



