लाखों टन फ्लाईऐश की ट्रांसपोर्टिंग में करोड़ों रुपए का हो रहा वारा-न्यारा, इधर सड़क किनारे राखड़ ही राखड़
ट्रांसपोर्ट कंपनी मेसर्स जेपीडब्ल्यू व मेसर्स अद्विका ने सिस्टम को बना दिया खेल, टीआरएन एनर्जी से उठा रहा राखड़
रायगढ़। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तहसील से जशपुर होते हुए झारखंड तक बन रही एनएच की सड़क में खूब खेला हो रहा है। एनएच का बेस ही ‘भ्रष्टाचार’ से बन रहा है। फ्लाईऐश ट्रांसपोर्टिंग के नाम पर करोड़ों रुपए का वारा-न्यारा हो रहा है। ट्रांसपोर्टर्स ने एनएच निर्माण कर रही ठेका कंपनी के एनटीपीसी दर्रीपाली व एनएचएआई के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरा सिस्टम को चैलेंज कर दिया है। मजाल है कि इन पर कोई हाथ भी डाल सके। इसके पहले एनटीपीसी लारा व सीपत से भी फ्लाईऐश ट्रांसपोर्टिंग में इसी तरह करोड़ों रुपए के घालमेल का मामला सामने आ चुका है। उसके बाद भी ट्रांसपोर्टरों का यह खेल बदस्तूर जारी है।
पूरा मामला भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायगढ़ जिले की धरमजयगढ़ तहसील से जशपुर होते हुए झारखंड तक बन रही एनएच का है। इसका ठेका दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (डीबीएल) को मिला हुआ है। इस कंपनी के कार्य पर सड़क निर्माण की शुरुआत से ही सवालिया निशान लग रहे हैं। अब फ्लाईऐश के नाम पर नया खेल चल रहा है। जानकारी के मुताबिक एनएच निर्माण के लिए बेस में डालने के लिए फ्लाईऐश की जरूरत पड़ता है। इसके लिए डीबीएल ने ट्रांसपोर्टर मेसर्स जेपीडब्ल्यू व मेसर्स अद्विका को ठेका दिया हुआ है, इन दोनों ट्रांसर्पोटरों को एनटीपीसी दर्रीपाली, सुंदरगढ़ (ओडिशा) से फ्लाईऐश लाकर निर्माणाधीन एनएच पर डालना है।
लेकिन ट्रांसपोर्ट कंपनियां ऐसा न कर जिले में स्थित पावर कंपनियों से सेटिंग कर वहां से फ्लाईऐश उठा रही हैं और निर्माणाधीन एनएच पर डाल रही हैं। पत्थलगांव एनएच में घरघोड़ा स्थित टीआरएन एनर्जी का फ्लाईऐश जा रहा है। जबकि एनटीपीसी दर्रीपाली, सुंदरगढ़ से फ्लाईऐश उठाकर वहीं आसपास सड़क किनारे या अन्य किसी स्थान पर डाल दिया जा रहा है।
इस तरह जिस फ्लाईऐश को दर्रीपाली सुंदरगढ़ से धरमजयगढ़, पत्थलगांव तक लाने में करीब 100-150 किमी का सफर करना पड़ता। इस दूरी को तय करने में जितना डीजल खपत होता, उससे बचने ट्रांसपोर्टरों ने यह खेल अपना लिया है। इस तरह वह 50 से 100 किमी दूरी में लगने वाले डीजल के खर्च को बचा ले रहा है। इस पूरे खेल में एनएच ठेका कंपनी डीबीएल के साथ एनएचएआई और एनटीपीसी के अधिकारियों पर भी सवालिया निशान लग रहा है।

क्योंकि इन अधिकारियों के साथ लिए बिना ट्रांसपोर्टर यह काम कर ही नहीं सकता। इस तरह लाखों टन फ्लाईऐश की ट्रांसपोर्टिंग में लाखों-करोड़ों का हेर-फेर किया जा रहा है। इससे एनटीपीसी के साथ सरकार को भी लाखों की चपत लग रही है। उसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर आंखें मूंदे हुए हैं और ट्रांसपोर्टर व ठेका कंपनी भ्रष्टाचार के इस पैसे से लाल होते जा रहे हैं।
एनएचएआई दिल्ली तक शिकायत की तैयारी
एनएच के सड़क निर्माण में चल रहे फ्लाईऐश ट्रांसपोर्टिंग के इस खेल का मामला पूरी तरह उजागर हो चुका है। स्थानीय स्तर पर इसकी शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसलिए अब एनएचएआई (नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया) दिल्ली तक शिकायत की तैयारी चल रही है। इस संबंध में युवा संकल्प संगठन के महामंत्री अमर सिंह राजपूत का कहना है कि जब फ्लाईऐश के नाम पर इस तरह का खेल हो रहा है, तो क्या गारंटी है कि ठेका कंपनी डीबीएल सड़क निर्माण पर लगने वाली छड़, गिट्टी व सीमेंट को तय मापदंड में ही बनाएगी। यदि भ्रष्टाचार का यह खेल इसी तरह चलता रहा, तो एनएच की गुणवत्ता पूरी तरह प्रभावित होगी और सड़क तो बिलकुल भी नहीं चलेगी। उन्होंने इसकी शिकायत एनएचएआई दिल्ली में करने की बात करते हुए कहा कि भारतमाला प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सड़क एवं परिवहन नितिन गडकरी का अहम व ड्रीम प्रोजेक्ट है, जो देश के विकास में अहम योगदान देगा।

जीपीएस सिस्टम का भी ट्रांसपोर्टरों ने निकाल लिया तोड़



