रायगढ़ : चिराईपानी स्थित ओम रूपेश स्टील प्लांट में एक 9 माह की गर्भवती महिला मजदूर की दर्दनाक मौत के बाद अंततः पुलिस और प्रशासन की नींद टूट गई है। लगातार उठ रहे सवालों और जनआक्रोश के बाद प्रशासन ने रसूखदार कंपनी प्रबंधन पर अपना शिकंजा कस दिया है।
पूंजीपथरा पुलिस ने प्लांट के डायरेक्टर शंकर लाल अग्रवाल और दयानंद अग्रवाल के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही बरतने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (1) और 125 A के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। वहीं, शुक्रवार को जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सार्वजनिक तालाब पर प्लांट द्वारा किए गए भारी-भरकम अवैध अतिक्रमण को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया।
मौत का वो ‘टिन का पिंजरा’ और रातों-रात मिटाए गए सबूत
हादसे की जो जमीनी हकीकत सामने आई है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। प्रबंधन ने मजदूरों को जानवरों की तरह रखने के लिए 20 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल से सटाकर एक टिन का शेड (पिंजरा) बना रखा था। लापरवाही की हद यह थी कि इसी भारी दीवार के बिल्कुल करीब एक गहरा गड्ढा खोद दिया गया, जिससे दीवार की नींव खोखली हो गई। तेज आंधी में यह दीवार ताश के पत्तों की तरह गिरी और 9 माह की गर्भवती महिला की जान ले ली। इस हादसे में दो अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। हैरानी की बात यह है कि घटना के तुरंत बाद जांच टीम के पहुंचने से पहले ही रातों-रात उन टिन के शेडों को वहां से गायब कर दिया गया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
मुआवजा तो दूर, मौत को बता रहे ‘फ्री पब्लिसिटी’
इस पूरे घटनाक्रम ने कंपनी के मालिक शंकर लाल अग्रवाल का संवेदनहीन और अमानवीय चेहरा उजागर कर दिया है। चुनाव के वक्त ‘समाजसेवी’ का चोला ओढ़ने वाले इस उद्योगपति ने अब तक पीड़ितों के लिए किसी मुआवजे की घोषणा नहीं की है। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को किसी अच्छे निजी अस्पताल के बजाय सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराकर प्रबंधन ने पल्ला झाड़ लिया है।
रायगढ़ सृष्टि के सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में अपनी ‘जमानत’ तक न बचा पाने वाले इस उद्योगपति के गुर्गे अब इस दर्दनाक मौत से मचे बवाल को ‘फ्री की पब्लिसिटी’ बता रहे हैं। उनका मानना है कि जिस पीआर (Public Relations) के लिए उन्हें करोड़ों खर्च करने पड़ते थे, वो इस विवाद से मुफ्त में हो रहा है।
40 फीट ऊंची ‘किले’ की दीवार पर गरजा प्रशासन का बुलडोजर
लंबे समय से ग्रामीण शिकायत कर रहे थे कि प्लांट ने सार्वजनिक तालाब को निगलने के लिए 35 से 40 फीट ऊंची दीवार खड़ी कर ली है। हाल ही में कांग्रेस के जांच दल ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और शुक्रवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इस अवैध ‘किले’ की दीवार पर बुलडोजर चलाकर उसे ढहा दिया गया।

हवा में उड़ते नियम: धधकती भट्ठी, चप्पल में मजदूर और जहरीला धुआं
ओम रूपेश स्टील प्लांट में श्रम और पर्यावरण कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं:
- श्रम विभाग बेखबर: कारखाने में काम करने वाले मजदूरों का कोई पंजीयन नहीं है।
- सुरक्षा नदारद: धधकते स्टील प्लांट के अंदर मजदूर महज हवाई चप्पल पहनकर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
- पर्यावरण से खिलवाड़: चंद रुपये बचाने के लिए ईएसपी (ESP) मशीन को बंद रखा जाता है, जिससे पूरा इलाका जहरीले धुएं से घुट रहा है।
- ग्रीन बेल्ट पर अतिक्रमण: हरियाली के लिए तय जमीन पर अवैध रूप से स्लैग (Slag) क्रेशर प्लांट लगा दिया गया है और जंगल के बीच बने इस प्लांट के अंदर अब पर्यावरण के नाम पर एक भी पेड़ नहीं बचा है।
आगे क्या: कई और फाइलों से उठ सकती है धूल
सूत्रों की मानें तो एफआईआर और बुलडोजर की कार्रवाई के बाद प्रशासन अब ‘फुल एक्शन मोड’ में आ गया है। सड़क पर अवैध कब्जे, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की अनदेखी और श्रम कानूनों के खुले उल्लंघन की फाइलें अब टेबल पर आ चुकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में शंकर लाल अग्रवाल और उनके प्लांट पर प्रशासन की कुछ और बड़ी और कड़ी गाज गिर सकती है।



