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चिरईपानी में ‘अग्रोहा स्टील’ की दबंगई: पार्किंग के नाम पर हथियाई 3 एकड़ सरकारी जमीन, जंगल उजाड़ कर बना दिया ‘राख का डंपिंग यार्ड’

रायगढ़: औद्योगीकरण के नाम पर रायगढ़ जिले में उद्योगपतियों की मनमानी और नियमों की धज्जियां उड़ाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिरईपानी से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो बताता है कि कैसे चंद फायदों के लिए पर्यावरण और ग्रामीणों की जिंदगी को दांव पर लगाया जा रहा है। यहां ‘अग्रोहा स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड’ प्रबंधन पर आरोप है कि उसने पार्किंग के नाम पर ली गई 3 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा जमा लिया है। हरे-भरे पेड़ों की बलि चढ़ाकर रातों-रात इस जगह को फ्लाई ऐश (राख) का डंपिंग यार्ड बना दिया गया है।

​परेशान ग्रामीणों ने अब जिला कलेक्टर के जनदर्शन में पहुंचकर इस ‘काले कारनामे’ की शिकायत दर्ज कराई है।

पार्किंग की आड़ में बड़ा फर्जीवाड़ा

​इस पूरे विवाद की नींव इसी साल की शुरुआत में रखी गई थी। बीते 29 जनवरी 2026 को ग्राम पंचायत लाखा ने एक प्रस्ताव पारित कर खसरा नंबर 01 की 3 एकड़ शासकीय भूमि अग्रोहा प्लांट को दी थी। शर्त साफ थी— इस जमीन का इस्तेमाल केवल ‘भारी वाहनों की पार्किंग’ के लिए होगा।

​लेकिन पंचायत के भरोसे का सरेआम कत्ल कर दिया गया। प्रबंधन ने मनमानी करते हुए उस जमीन पर मौजूद ‘छोटे झाड़ के जंगल’ को बेदर्दी से काट डाला। वहां जाली तार से अवैध बाउंड्रीवॉल तान दी गई और देखते ही देखते यह जगह फ्लाई ऐश डंप करने का सुरक्षित अड्डा बन गई। मौके के हालात साफ गवाही दे रहे हैं कि कैसे पेड़ों के बीच फेंसिंग कर सरकारी जमीन को निगलने की साजिश रची गई है।

पंचायत के अल्टीमेटम की उड़ी धज्जियां

​जैसे ही प्रबंधन की यह पोल खुली, गांव में भारी आक्रोश पनप गया। ग्रामीणों के तीखे विरोध के बाद 18 अप्रैल 2026 को बुलाई गई ग्राम सभा में प्लांट को जमीन देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से निरस्त कर दिया गया।

​इसके बाद 7 मई 2026 को सरपंच इन्द्र कुमार पंडा ने अग्रोहा प्लांट के उद्योग प्रबंधक को कड़ा नोटिस जारी किया। नोटिस में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि तत्काल प्रभाव से फ्लाई ऐश हटाया जाए, काटे गए पेड़ों की भरपाई हो और बाउंड्रीवॉल उखाड़ी जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन सत्ता और पैसे के नशे में चूर प्रबंधन ने इस नोटिस को मानो कचरे की टोकरी में डाल दिया।

सांसों में घुलता मौत का ‘स्लो पॉइजन’

​इस मनमानी का सबसे खौफनाक असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस शासकीय भूमि का उपयोग गांव के विकास के लिए होना था, वहां अब राख के पहाड़ खड़े हैं।

​हवा के साथ उड़ती ये राख अब सीधे किसानों के खेतों में बिछ रही है, जिससे उपजाऊ जमीन बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है। बात सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है; हवा में घुलता फ्लाई ऐश का यह ‘स्लो पॉइजन’ ग्रामीणों के फेफड़ों तक पहुंच रहा है। गांव के बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा व सांस की गंभीर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। गांव वाले दहशत में हैं कि अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया, तो यह राख पूरे गांव की सांसें घोंट देगी।

अब सिर्फ कलेक्टर से है न्याय की आस

​सोमवार को जनदर्शन में पहुंचे ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के सामने अपनी पीड़ा रखी है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर सख्त कार्रवाई की जाए।