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खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को बड़ी सौगात: शिक्षा और कौशल विकास को नई उड़ान, डीएमएफ के 19.20 लाख से 15 युवाओं को आईएचएम रायपुर में मिलेगा हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट प्रशिक्षण का सुनहरा अवसर

रायगढ़ । मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की मंशानुरूप रायगढ़ जिला प्रशासन ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं का भविष्य संवारने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिले के लैलूंगा और धरमजयगढ़ क्षेत्र के 15 युवाओं को अब प्रतिष्ठित आईएचएम (IHM) रायपुर में हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाया जाएगा। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इन विद्यार्थियों का पूरा एक वर्षीय शैक्षणिक सत्र (2026-27) डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) मद से पूरी तरह वित्तपोषित रहेगा। इससे युवाओं को किसी भी प्रकार की आर्थिक बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

कलेक्टर के निर्देश पर 19.20 लाख मंजूर

अक्सर आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण उच्च शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण से वंचित रह जाने वाले लैलूंगा और धरमजयगढ़ विकासखंड के युवाओं के लिए प्रशासन की यह पहल उम्मीद की एक नई किरण है। कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास के अध्यक्ष  मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर इस योजना के लिए डीएमएफ मद से 19 लाख 20 हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। प्रशासन की इस ठोस पहल का मुख्य उद्देश्य अंचल के युवाओं को सीधे तौर पर शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों से जोड़ना है।

सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नींव

लैलूंगा और धरमजयगढ़ जैसे संसाधन-बहुल और खनन प्रभावित क्षेत्रों में यह योजना केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है। वर्षों से इन क्षेत्रों में शिक्षा और रोजगार के सीमित अवसर रहे हैं। ऐसे में युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा और कौशल विकास को ही प्रशासन ने दीर्घकालिक विकास की सबसे मजबूत चाबी माना है।

अन्य क्षेत्रों में भी मिल रही मदद

इसी विजन के साथ रायगढ़ जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ फंड का इस्तेमाल युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में किया जा रहा है। प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के युवाओं को सिर्फ हॉस्पिटैलिटी ही नहीं, बल्कि नर्सिंग, चिकित्सा शिक्षा, इंजीनियरिंग, विधि (लॉ), प्रबंधन, उच्च शिक्षा और अन्य व्यावसायिक व तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए भी जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए।

​प्रशासन के इस महत्वपूर्ण निर्णय से न केवल इन दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को उच्च शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि पूरे अंचल में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और रोजगार सृजन को एक नई गति मिलेगी।