रायगढ़: बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और जहरीली हवाओं के कारण रायगढ़ जिले में हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं, और स्थानीय लोग इसी जहरीले माहौल में जीवनयापन करने को विवश हैं। प्रशासन की अनदेखी, दिखावटी लीपापोती और ‘अंडर टेबल’ समझौतों के खिलाफ अब रायगढ़ के युवाओं ने अपनी आवाज मुखर कर दी है। प्रकृति प्रेमी और समाजसेवी अमर सिंह राजपूत ने दिल्ली के एक NGO के साथ मिलकर रायगढ़ को प्रदूषण मुक्त बनाने का कड़ा संकल्प लिया है।
कागजों में 100% निपटान, हकीकत में फ्लाई ऐश के पहाड़
वर्तमान में फ्लाई ऐश रायगढ़ जिले की सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है। समाजसेवी अमर सिंह राजपूत ने बताया कि पिछले वर्ष रायगढ़ में लगभग 197 लाख टन फ्लाई ऐश का उत्पादन हुआ। सरकारी आंकड़ों में गाइडलाइन के अनुरूप इसके 100% निपटान (ईंटें बनाने और गड्ढों में मिट्टी डालकर पौधारोपण) का दावा किया गया है, लेकिन यह सच नहीं है। सच्चाई यह है कि सिंघल स्टील, रायगढ़ इस्पात और नव दुर्गा जैसे उद्योगों के नाम पर केवल दिखावटी कार्रवाई हुई है और फ्लाई ऐश के बड़े-बड़े पहाड़ बना दिए गए हैं। जिले में जिंदल पावर, TRN एनर्जी, SKS पावर, और अडानी पॉवर जैसे कई बड़े प्लांट मौजूद हैं जिनसे भारी मात्रा में यह राख निकल रही है।
बीमारियों की चपेट में शहर, केलो नदी भी प्रदूषित
पूरे शहर में हर तरफ उद्योगों से निकलने वाली फ्लाई ऐश और कोयले की डस्ट उड़ रही है। इसके कारण शहरवासियों में सांस, त्वचा और आंखों से संबंधित गंभीर बीमारियां सामने आ रही हैं। NTPC, सिंघल स्टील, रायगढ़ इस्पात और नव दुर्गा जैसे उद्योगों के फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टर अधिकारियों के साथ सेटिंग करके इस जहरीली राख को यत्र-तत्र फेंक रहे हैं।
स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि यह राख अब बहकर जीवनदायिनी केलो नदी के पानी में भी पहुंच रही है। अमर सिंह राजपूत ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि यही हाल रहा, तो भविष्य में करोड़ों टन फ्लाई ऐश रायगढ़ के बच्चों की सांसों और उनके भविष्य पर गहरा दुष्प्रभाव डालेगी, जबकि ज्यादातर अधिकारी ‘अंडर टेबल’ सेटल हो चुके हैं।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
इस पूरी स्थिति की जानकारी देते हुए अमर सिंह राजपूत ने युवाओं का आह्वान किया है कि अब यह सब नहीं चलने दिया जाएगा। रायगढ़ के युवा जाग चुके हैं और जमीन पर उन उद्योगों के खिलाफ लड़ाई लड़ने को तैयार हैं जो हवा और पानी में जहर घोल रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे केवल उद्योगों से ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों से भी लड़ेंगे। आम जनता को शुद्ध हवा और शुद्ध पानी का हक दिलाने के लिए, जरूरत पड़ने पर NGO के माध्यम से यह लड़ाई हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी जाएगी।



