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महादेव सट्टा ऐप का मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर ओमान में गिरफ्तार, फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट से किया था प्रवेश

रायपुर/मस्कट: हजारों करोड़ रुपये के महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप (Mahadev Online Book) घोटाले के मुख्य आरोपी और सरगना सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है। फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के जरिए ओमान में घुसने की कोशिश कर रहे चंद्राकर को ‘रॉयल ओमान पुलिस’ ने भारतीय एजेंसियों द्वारा जारी इंटरपोल के ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ के आधार पर दबोचा है।

​इस गिरफ्तारी के बाद भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर चंद्राकर को वापस लाने के लिए औपचारिक प्रत्यर्पण (Extradition) की प्रक्रिया तेज कर दी है।

प्रत्यर्पण की उल्टी गिनती शुरू

​लंबे समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में पनाह लिए हुए सौरभ चंद्राकर की तलाश भारतीय जांच एजेंसियों— प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI को सरगर्मी से थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओमान पुलिस ने अवैध प्रवेश और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। भारत सरकार उसे जल्द से जल्द देश लाने के लिए ओमान सरकार के साथ संपर्क में है, हालांकि आरोपी ने अपना बचाव करने के लिए स्थानीय वकीलों की एक टीम नियुक्त कर ली है।

इंटरपोल से मिला था करारा झटका

​इससे पहले, चंद्राकर ने इंटरपोल के CCF (Commission for the Control of INTERPOL’s Files) में याचिका दायर कर अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस को हटाने की मांग की थी। उसका दावा था कि भारत में उसके खिलाफ ‘राजनीतिक कारणों’ से मामला दर्ज किया गया है। लेकिन, इंटरपोल ने उसकी दलील को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला विशुद्ध रूप से गंभीर वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, इसलिए रेड नोटिस बरकरार रहेगा।

प्रत्यर्पण टालने की सोची-समझी साजिश?

​सूत्रों और अधिकारियों का मानना है कि इंटरपोल में अपनी हार तय देखकर सौरभ ने UAE छोड़ दिया था। उसका फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट के सहारे ओमान पहुंचना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ओमान के सख्त कानूनों के तहत फर्जी पासपोर्ट के इस्तेमाल पर 3 से 5 साल की जेल हो सकती है। संभवतः वह स्थानीय कानूनी प्रक्रिया में उलझकर भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को लंबा खींचना चाहता है।

पहले भी पुलिस के रडार पर आ चुका है चंद्राकर

​वर्ष 2019 से फरार चल रहे सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं। साल 2024 की शुरुआत में उसे इंटरपोल नोटिस के आधार पर दुबई में हिरासत में लिया गया था और कुछ समय तक ‘हाउस अरेस्ट’ में रखा गया था। तब भारत ने प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा था, लेकिन तकनीकी कारणों से उसे रिहा कर दिया गया। अब ओमान में हुई इस गिरफ्तारी को भारतीय जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।