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DMF फंड का सच: घर-आंगन हमारा उजड़ा, और पैसा खा गया सिस्टम! उद्योगपति नवीन जिंदल से रायगढ़ के युवा रवि भगत की मार्मिक गुहार.. देखें video..

रायगढ़। जब देश के विकास के नाम पर एक ग्रामीण अपना घर-आंगन, अपनी खेती और यहां तक कि अपने पूर्वजों के देवी-देवताओं का स्थान तक छोड़ देता है, तो उसके बदले उसे क्या मिलता है? प्रदूषण, टूटी सड़कें, और अंतहीन दर्द! रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र के एक आदिवासी युवा रवि भगत ने एक बेहद मार्मिक और प्रभावशाली वीडियो के जरिए देश के जाने-माने उद्योगपति और सांसद माननीय नवीन जिंदल से एक ऐसा सवाल पूछा है, जो खदान प्रभावित हर उस व्यक्ति की आवाज़ है जो अपने हक़ के लिए तरस रहा है।

आखिर उद्योगपतियों को क्यों दी जाती हैं गालियां?

रवि भगत अपने वीडियो संदेश में माननीय नवीन जिंदल को संबोधित करते हुए एक बहुत ही व्यावहारिक सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, “आप देश के एक बड़े उद्योगपति, खिलाड़ी और सांसद हैं। आप जहां उद्योग लगाते हैं, वहां विकास और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। आप इनकम टैक्स देकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। लेकिन फिर भी जब कोई नई खदान खुलती है या उद्योग का विस्तार होता है, तो स्थानीय लोग आपका विरोध क्यों करते हैं? आपको बुरा-भला क्यों कहा जाता है?” इस सवाल का जवाब देते हुए रवि उस दर्द को बयां करते हैं जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

DMF फंड: जनता का हक या सिस्टम की जागीर?

युवा रवि भगत ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड में हो रहे भारी भ्रष्टाचार की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, उद्योगों और खदानों के कारण विस्थापित और प्रभावित होने वाले लोगों के नुकसान की भरपाई के लिए DMF फंड बनाया गया है। उद्योगपति अपनी तरफ से इस मद में करोड़ों रुपये जिला प्रशासन को देते हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विकास हो सके।

​लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। रवि बहुत बेबाकी से कहते हैं, “जो पैसा आप DMF के तहत देते हैं, क्या कभी आपने सोचा है कि उसका क्या होता है? सच्चाई यह है कि कलेक्टर और स्थानीय नेता-मंत्री इस भारी-भरकम राशि की ‘बंदरबांट’ करते हैं।” छला गया है खदान प्रभावित ग्रामीण

यह खबर केवल एक आर्थिक अनियमितता की नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के कुचले जाने की कहानी है। ग्रामीणों को विस्थापन के समय जो वादे किए जाते हैं, वे कभी पूरे नहीं होते। ग्रामीण विकास की कीमत अपना सब कुछ खोकर चुकाते हैं, लेकिन उनके हिस्से में सिर्फ कोयले की धूल, भारी वाहनों की आवाजाही से होने वाली दुर्घटनाएं और अपनों को खोने का दर्द आता है।

​ग्रामीण सोचते हैं कि उद्योगपतियों ने उनका जीवन बर्बाद कर दिया, जबकि असल में उनके विकास का पैसा स्थानीय प्रशासन की लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका होता है।

सांसद नवीन जिंदल से मार्मिक अपील

एक जन प्रतिनिधि और उद्योग जगत के बड़े चेहरे के रूप में नवीन जिंदल से एक विशेष गुहार लगाई गई है। रवि ने हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि सांसद होने के नाते वे संसद में यह सवाल उठाएं कि रायगढ़ के तमनार जैसे प्रभावित क्षेत्रों से कितना DMF फंड जमा होता है और वास्तव में प्रभावितों पर कितना खर्च होता है।

​उनका मानना है कि यदि नवीन जिंदल इस मुद्दे पर प्रशासन से सवाल करेंगे, तो न केवल इस फंड का दुरुपयोग रुकेगा, बल्कि ग्रामीणों के बीच उद्योग जगत और स्वयं नवीन जिंदल का सम्मान भी बढ़ेगा।