रायगढ़, 3 जुलाई 2026। न्याय, सुरक्षा और समाज के बीच की दूरी को मिटाने की दिशा में रायगढ़ पुलिस ने एक बेहद सकारात्मक और मानवीय कदम उठाया है। शुक्रवार को रायगढ़ शहर में नए आपराधिक कानूनों और आधुनिक पुलिसिंग को लेकर दो दिवसीय जनजागरूकता प्रदर्शनी और कार्यशाला की भव्य शुरुआत हुई। खास बात यह रही कि इस आयोजन में न केवल पुलिस अधिकारियों ने नई तकनीकों का पाठ पढ़ा, बल्कि स्कूली बच्चों ने भी खाकी वर्दी वालों के साथ खुलकर संवाद किया और कानून की बारीकियों को एक दोस्ताना माहौल में समझा।
मुख्य बिंदु:
- पुलिस और पब्लिक के बीच बनी सेतु: नए कानूनों (BNS, BNSS, BSA) पर आमजन को जागरूक करने की बड़ी पहल।
- बच्चों के लिए खास आयोजन: एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बच्चों के सवालों के दिए दिलचस्प जवाब।
- हाईटेक होगी रायगढ़ पुलिस: AI, साइबर सुरक्षा और रियल टाइम इंटेलिजेंस पर अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण।
- 4 जुलाई का निमंत्रण: शनिवार को आयोजित होगा “पुलिस जन संवाद” कार्यक्रम।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ आगाज
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा, डीएसपी उन्नति ठाकुर, एसडीओपी सिद्धांत तिवारी, डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह और सुशांतो बनर्जी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह केवल एक औपचारिक शुरुआत नहीं थी, बल्कि पुलिस विभाग के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा संकल्प था।
हाईटेक और पारदर्शी पुलिसिंग की ओर कदम
कार्यशाला का पहला सत्र पूरी तरह से आधुनिक पुलिसिंग पर केंद्रित रहा। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी ने बताया कि नवंबर 2025 में आईआईएम नया रायपुर में हुए राष्ट्रीय पुलिस महानिदेशक और महानिरीक्षक सम्मेलन (DGPs/IGPs Conference-2025) की सिफारिशों को अब रायगढ़ में जमीन पर उतारा जा रहा है। आने वाले समय में पुलिसिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), CCTNS, डेटा एनालिटिक्स और रियल टाइम इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस होगी, ताकि अपराधियों पर नकेल कसी जा सके और आम जनता को त्वरित न्याय मिल सके।
इसी क्रम में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने डिजिटल पोर्टल्स और डीएसपी उन्नति ठाकुर ने CCTNS की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया।
नए कानूनों का सीधा अर्थ: पीड़ित-केंद्रित और त्वरित न्याय
दूसरे चरण में नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—के प्रावधानों को समझाया गया। इन कानूनों का मूल उद्देश्य सजा देना भर नहीं है, बल्कि पीड़ित को केंद्र में रखकर न्याय दिलाना, महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा पुख्ता करना और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
जब एसएसपी बने बच्चों के मार्गदर्शक (ह्यूमन टच)
इस आयोजन की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब सामने आई, जब स्कूली बच्चों ने पूरी ऊर्जा और उत्सुकता के साथ इसमें हिस्सा लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने एक कड़क अफसर की बजाय एक मार्गदर्शक की तरह बच्चों से संवाद किया। उन्होंने बच्चों को बताया कि कानून डराने के लिए नहीं, बल्कि उनकी हिफाजत के लिए बनाए गए हैं।
परिसर में चार विशेष जागरूकता स्टॉल लगाए गए थे:
- नवीन कानून
- यातायात सुरक्षा
- महिला सुरक्षा (हेलो सिस्टर हेल्पलाइन)
- साइबर अपराध
बच्चों ने इन स्टॉलों का भ्रमण किया और साइबर क्राइम से लेकर ट्रैफिक रूल्स तक पर पुलिस अधिकारियों से अपने मासूम लेकिन तीखे सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने पूरी सहजता से जवाब दिया।
एसएसपी का संदेश
कार्यक्रम के दौरान एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बेहद प्रभावशाली बात कही, “नवीन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव है, जब पुलिस और आमजन दोनों उनकी भावना, उद्देश्य और प्रक्रियाओं को समझें। यह कार्यशाला और प्रदर्शनी आधुनिक, पारदर्शी और जनकल्याणकारी पुलिसिंग की दिशा में हमारी एक महत्वपूर्ण पहल है।”
आज भी जारी रहेगा जागरूकता का यह सफर
4 जुलाई को इस कार्यक्रम का दूसरा दिन है। इस दिन “पुलिस जन संवाद” का विशेष आयोजन किया जाएगा, साथ ही जागरूकता प्रदर्शनी भी जारी रहेगी। रायगढ़वासियों से अपील है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें और पुलिस की इस बेहतरीन पहल का हिस्सा बनकर अपने अधिकारों और कानूनों के प्रति जागरूक हों।



