रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में संगठित अपराध और आदतन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने अपना शिकंजा कड़ा कर दिया है। इसी कड़ी में घरघोड़ा पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। पुलिस ने थाना क्षेत्र के एक कुख्यात निगरानी बदमाश मोहसीम खान उर्फ भुरू पठान को एक मजदूर के साथ मारपीट और लूटपाट करने के आरोप में गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। पकड़ा गया आरोपी इतना शातिर है कि उसे पुलिस पहले ‘जिला बदर’ (तड़ीपार) भी कर चुकी है।
मजदूर की गाढ़ी कमाई लूटी, दहशत फैलाने का था प्रयास
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर जिले के सीतापुर निवासी अरूण कुमार एक्का घरघोड़ा में रहकर मजदूरी करता है। बीते वर्ष 21 अक्टूबर की रात जब अरुण अपनी ड्यूटी खत्म कर पिकअप वाहन की तरफ लौट रहा था, तभी गुप्ता होटल के पास भुरू पठान ने उसे बीच रास्ते में रोक लिया। आरोपी ने नशे के लिए अरुण से रुपयों की मांग की। जब गरीब मजदूर ने पैसे देने से इनकार किया, तो भुरू पठान ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और जबरन उसकी जेब से 500 रुपये निकाल लिए। विरोध करने पर छीना-झपटी में अरुण का मोबाइल भी नीचे गिरकर टूट गया।
लंबे समय तक दहशत के साये में रहने के बाद, पीड़ित ने एसपी कार्यालय में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर घरघोड़ा पुलिस ने त्वरित जांच शुरू की।
मुखबिर की सटीक सूचना और रात के अंधेरे में दबिश
लूट की इस वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। घरघोड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव ने आरोपी की धरपकड़ के लिए मुखबिरों का जाल बिछाया। गुरुवार रात पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि भुरू पठान छिपते-छिपाते अपने गांव लौटा है। सूचना पुख्ता होते ही पुलिस टीम ने रात के अंधेरे में ही घेराबंदी कर आरोपी को उसके ठिकाने से धर दबोचा। कड़ी पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया, जिसके बाद उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
अपराध का पुराना है ट्रैक रिकॉर्ड, हो चुका है जिला बदर
गिरफ्तार आरोपी मोहसीम खान का अपराध की दुनिया से पुराना नाता रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2008 में चोरी और 2010 में लूटपाट के संगीन मामलों में वह पहले भी जेल की हवा खा चुका है। लगातार सुधरने की चेतावनियों के बावजूद जब उसकी आपराधिक गतिविधियों पर लगाम नहीं लगी, तो साल 2015 में रायगढ़ कलेक्टर के आदेश पर उसे ‘जिला बदर’ कर दिया गया था।



