रायगढ़ पुलिस का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार; दुबई से आ रही थी बेटिंग आईडी, करोड़ों के हवाला नेटवर्क और 7 सेकंड एडवांस ‘प्रगति टीवी’ का हुआ भंडाफोड़
रायगढ़। मध्य भारत के सबसे बड़े और संगठित ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क की जड़ें हिलाते हुए रायगढ़ पुलिस ने एक बेहद सनसनीखेज और अंतरराष्ट्रीय कड़ियों से जुड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह के कुशल नेतृत्व और सटीक रणनीति के चलते पुलिस की संयुक्त टीम ने सीधे गोवा के आलीशान कैंडोलिम बीच स्थित एक किराए के विला पर आधी रात को रेड मारकर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पैर पसार चुके 6 शातिर और बड़े सट्टा ऑपरेटरों को दबोच लिया है।
यह गिरोह कुख्यात खाईवाल “मन्नू नथानी” गैंग के लिए काम कर रहा था। पकड़े गए आरोपियों में रायपुर और खरसिया के बड़े नाम शामिल हैं, जिनके पास से 10 हाई-टेक स्मार्टफोन, लैपटॉप और करोड़ों रुपये के डिजिटल लेनदेन के साक्ष्य बरामद किए गए हैं। इस पूरे नेटवर्क के तार दुबई, मुंबई, हैदराबाद और नागपुर से जुड़े हुए हैं।
चक्रव्यूह की शुरुआत: ऐसे खुली सट्टा साम्राज्य की परतें
इस महा-पर्दाफाश की पटकथा हाल ही में रायगढ़ के कोतवाली थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 217/2026 और 218/2026 (छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 4, 7) के तहत हुई गिरफ्तारियों से लिखी गई। पुलिस ने जब सटोरिए करन चौधरी उर्फ करन अग्रवाल, पुष्कर अग्रवाल और सुनील अग्रवाल को रिमांड पर लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो पुलिस के हाथ ‘हवाला’ और खरसिया के रसूखदार सटोरिए अमित मित्तल के नेटवर्क का वो सिरा हाथ लगा, जिसने पुलिस को सीधे गोवा पहुंचा दिया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बिना वक्त गंवाए सीएसपी मयंक मिश्रा और डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह के नेतृत्व में साइबर सेल और कोतवाली पुलिस की एक स्पेशल टीम गठित कर गोवा रवाना की।
गोवा के विला में आधी रात को ‘सिंघम’ स्टाइल दबिश
गोवा के कैंडोलिम बीच के पास स्थित विला में जब रायगढ़ पुलिस ने रेड मारी, तो वहां का नजारा किसी कॉर्पोरेट ऑफिस जैसा था। लैपटॉप पर लाइनें चल रही थीं और फोन पर करोड़ों के दांव लग रहे थे। पुलिस को देखते ही आरोपियों में हड़कंप मच गया। शातिर सटोरियों ने अपने कॉलिंग फोन, हिसाब-किताब की डायरियां और तकनीकी साक्ष्य नष्ट करने की पूरी कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
गिरफ्तार सटोरियों की कुंडली:
- अमित मित्तल (उम्र 30 वर्ष, स्टेशन रोड, खरसिया) – पूर्व में भी चक्रधरनगर, खरसिया और घरघोड़ा में सट्टे के मामलों में नामजद।
- मोहित सोमानी (उम्र 38 वर्ष, समता कॉलोनी, रायपुर) – इस गैंग का मुख्य मास्टरमाइंड और लीडर, रायपुर के कई थानों में दर्ज हैं मामले।
- प्रकाश वाधवानी (उम्र 28 वर्ष, चौबे कॉलोनी, रायपुर)
- आकाश मोटवानी (उम्र 31 वर्ष, कचहरी चौक, रायपुर)
- राहुल खंडेलवाल उर्फ बाबू (उम्र 36 वर्ष, मैग्नेटो सिग्नेचर होम, तेलीबांधा, रायपुर)
- सुलभ खंडेलवाल उर्फ छोटा बाबू (उम्र 33 वर्ष, रामसागर पारा, रायपुर)
टेक्नोलॉजी का खौफनाक कॉम्बिनेशन: 3 तरीकों से देश को चूना लगा रहा था सिंडिकेट
पुलिस की तकनीकी जांच और मोबाइल डेटा की स्कैनिंग से जो खुलासे हुए हैं, उसने जांच अधिकारियों को भी चौंका दिया है। यह गिरोह तीन स्तरों पर हाई-टेक सट्टा चला रहा था:
- 1. अभिनंदन बुक और ज़ूम ऐप की जुगलबंदी: गिरोह सबसे पहले रायपुर से संचालित ‘अभिनंदन बुक/लाइन’ के जरिए क्रिकेट सेशन का भाव (रेट) लेता था। इसके बाद एक कस्टमाइज्ड APK बेस्ड Zoom App के जरिए नीचे के छोटे सटोरियों और प्लेयर्स को यह भाव डिस्ट्रीब्यूट किया जाता था।
- 2. 7 सेकंड का ‘टाइम एडवांटेज’ और प्रगति टीवी: सटोरियों ने लाइव मैच से भी 7 सेकंड पहले का ब्रॉडकास्ट देखने के लिए विशेष APK फाइलों के जरिए ‘प्रगति टीवी’ और ‘स्टार लाइव’ जैसे ऐप्स मोबाइल में डाल रखे थे। आम जनता को टीवी पर जो बॉल 7 सेकंड बाद दिखने वाली होती थी, उसकी जानकारी इन खाईवालों को पहले ही मिल जाती थी। इसी टाइम गैप (एडवांटेज) का फायदा उठाकर ये वर्चुअल कॉलिंग ऐप्स पर नीचे के सटोरियों को ठगते थे।
- 3. महादेव ऐप की तर्ज पर डिजिटल बेटिंग पैनल: गिरोह बड़े पैमाने पर All Panel Exchange, Taj 777, और Diamond Exchange जैसी सट्टा वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए सीधे आईडी बांटकर करोड़ों का दांव लगवा रहा था।
10% फिक्स कमीशन का खेल
ये सभी आरोपी मन्नू नथानी गैंग से जुड़े थे। शुरुआत इन्होंने बतौर एजेंट की थी, लेकिन धीरे-धीरे ये खुद बड़े सिंडिकेट बन गए। ये दुबई और महानगरों के अप-लिंक से सीधे आईडी खरीदते थे और नीचे के सटोरियों को बांटकर सीधे 10 प्रतिशत का नेट कमीशन अपनी जेब में डाल रहे थे। शुरुआती जांच में सिर्फ एक आईपीएल सीजन में ही करोड़ों के टर्नओवर के पुख्ता सुराग मिले हैं।
सीरियल नंबर वाले नोट… और करोड़ों का ‘हवाला नेटवर्क’
इस काले कारोबार की रीढ़ था इनका ‘हवाला नेटवर्क’। आरोपियों के फोन से जो व्हाट्सएप चैट और डेटा मिला है, उसमें देश के बड़े हवाला कारोबारियों के कोड्स दर्ज हैं। ये रुपयों के भौतिक लेनदेन के बजाय करेंसी नोटों के सीरियल नंबर को एक-दूसरे से साझा कर ‘भरोसे’ के दम पर देश के एक कोने से दूसरे कोने में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर रहे थे। गौरतलब है कि इस नेटवर्क से जुड़े आरोपियों से पुलिस पहले ही 1 करोड़ रुपये से अधिक की नगद राशि जब्त कर चुकी है।
दुबई कनेक्शन पर पुलिस की पैनी नजर
जांच में यह साफ हो चुका है कि इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा है। दुबई से ही महादेव सट्टा की तरह क्रिकेट बेटिंग आईडी जनरेट होकर देश के बड़े महानगरों (मुंबई, हैदराबाद) के रास्ते नागपुर और रायपुर पहुंचती थी। पुलिस अब इनके बैंक खातों और आर्थिक चैनलों को फ्रीज करने की तैयारी में है।
अपराधियों को पाताल से भी ढूंढ निकालेगी रायगढ़ पुलिस: एसएसपी
इस ऐतिहासिक कामयाबी पर एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने दोटूक शब्दों में सट्टा माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा:
”रायगढ़ पुलिस संगठित अपराध, ऑनलाइन सट्टा और अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क के खिलाफ पूरी तरह से आक्रामक मोड में है। अपराधियों का नेटवर्क कितना भी बड़ा हो और वे देश के किसी भी कोने में छिपे हों, पुलिस उन्हें ढूंढ निकालेगी। तकनीक की आड़ में अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई अभी थमी नहीं है, इसका दायरा और बढ़ेगा।”
इस जांबाज टीम को मिली सफलता
इस बेहद जटिल और अंतर्राज्यीय ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाने में एडिशनल एसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा, साइबर डीएसपी उन्नति ठाकुर और डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी विजय चेलक, एएसआई नंद कुमार सारथी, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह राणा, बृजलाल गुर्जर, करुणेश राय, रूप राम पटेल और आरक्षक प्रशांत पंडा, महेश पंडा, धनंजय कश्यप, पुष्पेंद्र जाटवर, जगमोहन ओगर, विकास प्रधान, रवींद्र कुमार गुप्ता, नवीन शुक्ला, मनोज पटनायक, गोविंद पटेल, रोशन एक्का, महिला आरक्षक मेनका चौहान तथा नव आरक्षक उमेश सिदार की बेहद सराहनीय और जांबाज भूमिका रही। सभी आरोपियों को रिमांड पर जेल भेजने की तैयारी पूरी कर ली गई है।



