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रायगढ़ में दर्दनाक हादसा: पत्नी के सामने 50 फीट ऊंचे पेड़ से गिरा ग्रामीण, मौके पर ही मौत… तेंदूपत्ता की चाह में फिर गई एक जान

धरमजयगढ़ । रोजी-रोटी की जद्दोजहद और तेंदूपत्ता संग्रह की जल्दबाजी ने एक बार फिर एक ग्रामीण की जान ले ली है। धरमजयगढ़ उपक्षेत्र के कापू थाना इलाके से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गए एक 55 वर्षीय अधेड़ की पेड़ से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। घटना के वक्त उसकी पत्नी भी उसी पेड़ के नीचे मौजूद थी और अपनी आंखों के सामने पति को दम तोड़ते देख वह बेसुध है।

संतुलन बिगड़ा और पल भर में उजड़ गया सुहाग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक कापू थाना क्षेत्र के ही ग्राम आलोला का निवासी था। इन दिनों अंचल के जंगलों में तेंदूपत्ता तुड़ाई का सीजन अपने चरम पर है। इसी सिलसिले में मृतक अपनी पत्नी के साथ कापू-धरमजयगढ़ मार्ग पर स्थित मड़वाताल घाट के घने जंगलों में पत्ता तोड़ने गया हुआ था। बताया जा रहा है कि ज्यादा और अच्छी पत्तियां इकट्ठा करने की चाह में वह करीब 50 फीट ऊंचे तेंदू के पेड़ पर चढ़ गया। ऊपर वह पत्तियों वाली डंगाल तोड़ रहा था और नीचे उसकी पत्नी उन्हें समेट रही थी। इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसला और संतुलन बिगड़ने से वह सीधे इतनी ऊंचाई से भरभरा कर जमीन पर आ गिरा। ऊंचाई इतनी ज्यादा थी कि उसे संभलने का कोई मौका नहीं मिला और सिर व शरीर पर आई गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उसके प्राण पखेरू उड़ गए।

जंगल में मची चीख-पुकार, जांच में जुटी पुलिस

इस खौफनाक हादसे के बाद जंगल में चीख-पुकार मच गई और वहां मौजूद अन्य संग्राहकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना कापू थाना पुलिस को दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। फिलहाल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

चंद पैसों की लालच और वन विभाग की अनदेखी पड़ रही भारी

यह घटना केवल एक हादसा भर नहीं है, बल्कि तेंदूपत्ता संग्रह के दौरान बरती जाने वाली घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है। अक्सर संग्राहक अधिक पत्तियां पाने के लालच में अपनी जान जोखिम में डालकर ऊंचे पेड़ों पर चढ़ जाते हैं। इससे न केवल ऐसे जानलेवा हादसों की आशंका बनी रहती है, बल्कि पेड़ों की बड़ी-बड़ी शाखाएं बेतरतीब ढंग से काटने के कारण बहुमूल्य वन संपदा का भी भारी विनाश हो रहा है।