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बिहान से बदली तकदीर: रविता, अंजना और ललिता बनीं “लखपति दीदी”, अब गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

  • मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के ‘सुशासन तिहार’ में साझा की सफलता की कहानी, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश
  • घर की चौखट से निकलकर संभाला कारोबार; सिलाई से लेकर दोना-पत्तल और सेंटिंग प्लेट व्यवसाय तक बनाई पहचान
  • बिहान योजना से जुड़कर बढ़ी आय, अब अन्य समूहों को भी दिला रहीं रोजगार और आजीविका की राह

रायगढ़ | 7 मई 2026 कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और साथ में सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो सफलता कदम चूमती है। रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड की तीन महिलाओं— रविता प्रधान, अंजना गुप्ता और ललिता शिकारी ने इस बात को सच कर दिखाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर इन महिलाओं ने न केवल अपनी गरीबी को मात दी, बल्कि आज वे “लखपति दीदी” के रूप में पूरे जिले के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं।

सुशासन तिहार में गूंजी कामयाबी की दास्तां

​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर प्रदेशभर में आयोजित हो रहे ‘सुशासन तिहार’ के तहत पुसौर के ग्राम ओरदा में आयोजित समाधान शिविर में इन तीनों महिलाओं ने अपनी प्रेरक संघर्ष गाथा साझा की। शिविर में मौजूद सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं के सामने जब इन लखपति दीदियों ने अपनी कहानी सुनाई, तो पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इन महिलाओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि घर की दहलीज पार कर आज की नारी आर्थिक साम्राज्य भी खड़ा कर सकती है।

ललिता शिकारी: सिलाई से लेकर सेंटिंग प्लेट के कारोबार तक

​ग्राम पंचायत सुकुलठली के दाऊभठली की रहने वाली ललिता शिकारी की यात्रा शून्य से शुरू हुई थी। उन्होंने ‘पूजा महिला स्व सहायता समूह’ बनाया और सिलाई का काम शुरू किया। लेकिन ललिता यहीं नहीं रुकीं। बैंक से मिले मुद्रा लोन और समूह के सहयोग से उन्होंने पक्के मकानों की ढलाई में इस्तेमाल होने वाली सेंटिंग प्लेट का व्यवसाय शुरू किया। आज वे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों के लिए सेंटिंग प्लेट किराये पर देती हैं। सालाना 2 लाख रुपये की आय अर्जित करने वाली ललिता कहती हैं, “बिहान ने मुझे सिर्फ पैसा नहीं, पहचान और सम्मान भी दिया है।”

रविता प्रधान: खेती और सेवा से बनीं मिसाल

​सुकुलठली की ही रविता प्रधान कभी सिर्फ घरेलू काम तक सीमित थीं। बिहान से जुड़ने के बाद आज वे FLCRP के रूप में 6 ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। वे अन्य महिलाओं को ऋण दिलाने और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का सेतु बनी हुई हैं। खुद के ‘सरस्वती समूह’ के माध्यम से उन्होंने खेती के लिए कर्ज लिया और आज 3 एकड़ सिंचित भूमि पर उन्नत खेती कर सालाना 2 लाख रुपये से अधिक कमा रही हैं।

अंजना गुप्ता: दोना-पत्तल और चप्पल निर्माण से आत्मनिर्भरता

​ग्राम कोसमंदा की अंजना गुप्ता ने ‘दुर्गा महिला स्व सहायता समूह’ के जरिए दोना-पत्तल निर्माण का छोटा सा काम शुरू किया था। मेहनत रंग लाई और उन्होंने बाद में चप्पल बनाने की मशीन भी लगा ली। बिहान और सामुदायिक निवेश निधि (CIF) से मिले ऋण ने उनके सपनों को पंख दिए। आज अंजना का व्यवसाय फल-फूल रहा है और वे अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं।

बदल रहा है ग्रामीण परिवेश

इन तीनों महिलाओं की कहानी इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आ रहा है। “बिहान” योजना केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास का आधार बन गई है। शिविर में मौजूद महिलाओं ने इन लखपति दीदियों के अनुभव से सीख लेते हुए स्वयं भी आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।