Skip to content

रायगढ़ के तमनार में नशे का बड़ा सिंडिकेट? गुपचुप तरीके से हो रही थी अफीम की खेती.. अधिकारियों के उड़े होश..!

रायगढ़। छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार की जड़ें लगातार गहरी होती जा रही हैं। बलरामपुर और दुर्ग के बाद अब रायगढ़ जिले में भी नशे की खेती का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के तमनार स्थित आमाघाट गांव में नदी के किनारे लगभग एक से डेढ़ एकड़ ज़मीन पर अफीम की खेती की जा रही थी। इस खुलासे के बाद पूरे पुलिस और प्रशासन महकमे में हड़कंप मच गया है।

पक कर तैयार थी फसल, महीनों से निकल रहा था अफीम

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस गोरखधंधे की भनक प्रशासन को तब लगी, जब अफीम की फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो चुकी थी। तस्करों ने पौधों के डोड़ों पर चीरा लगाकर अफीम निकालना भी शुरू कर दिया था। ग्रामीणों से मिली गुप्त सूचना के बाद जब तमनार थाना प्रभारी प्रशांत राव, एफएसएल (FSL) टीम, राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर वे भी सन्न रह गए।

“पौधों पर चीरे के निशान, सैम्पल लिए जा रहे हैं”

मौके पर जांच के लिए पहुंचे एफएसएल एक्सपर्ट श्री भगत ने इस बात की पुष्टि की है कि ये अफीम के ही पौधे हैं। उन्होंने बताया, “यह स्पष्ट रूप से अफीम का पौधा है। पौधों में चीरा लगाने के निशान साफ दिख रहे हैं, जिससे नशीला पदार्थ निकाला जाता है। चीरे से निकला सफेद दूध अब सूखकर काला पड़ चुका है। पौधों के सैम्पल लिए जा रहे हैं।”

पुलिस और खुफिया तंत्र (LIU) पर उठे गंभीर सवाल

अफीम की खेती कोई एक-दो दिन का काम नहीं है; इसके बीज बोने से लेकर फसल तैयार होने में महीनों का समय लगता है। ऐसे में तमनार पुलिस और स्थानीय खुफिया विभाग (LIU) की कार्यप्रणाली पूरी तरह से कटघरे में आ गई है। नदी के शांत किनारे इतनी बड़ी मात्रा में नशे की खेती होती रही और वर्दीधारियों को कानों-कान खबर नहीं हुई, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। इस घटना ने जिले में किसी बड़े ड्रग सिंडिकेट के सक्रिय होने की आशंका को जन्म दे दिया है।

जमीन के दस्तावेजों की हो रही जांच, आरोपी की हुई पहचान

आमाघाट की इस घटना ने रायगढ़ की शांत आबोहवा में जहर घोलने का काम किया है। फिलहाल पुलिस और राजस्व विभाग की टीम जमीन के दस्तावेजों को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि यह जमीन किसकी है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने मुख्य आरोपी की पहचान कर ली है। वहीं, स्थानीय लोगों में यह चर्चा जोरों पर है कि बिना किसी रसूखदार के संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर नशे का यह काला कारोबार संभव नहीं है। खबर लिखे जाने तक मामले की विभागीय जांच तेजी से जारी है।