रायगढ़। एनसीएलटी के अजीबो गरीब रहमोंकरम के बाद कागजों के साथ भौतिक रूप से भी दफन हो रही जूटमिल एक बार फिर चर्चा में है। सालों से बंद हो चुकी इस मिल के मजदूरों के बकाया साढ़े 10 करोड़ रूपए की रिकवरी के लिए ईएसआईसी ने रिकवरी नोटिस निकाला है और जूटमिल की उक्त प्रापर्टी के पूर्व व वर्तमान मालिकों से वसूली के लिए इसे चस्पा किया है। जिससे रायगढ़ से लेकर कोलकाता तक बैचेनी बढ गई है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम रायपुर ने रायगढ़ प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, पूर्व में मोहन जूट मिल्स लिमिटेड, के खिलाफ 10 करोड़ 42 लाख रूपए से अधिक की बकाया वसूली का निषेधात्मक आदेश चस्पा कर दिया है। इस कार्रवाई ने न केवल औद्योगिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईएसआईसी द्वारा चस्पा आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कंपनी द्वारा वर्षों से कर्मचारियों के बीमा अंशदान और नियोक्ता अंशदान की राशि जमा नहीं की गई, जिसके चलते अब आयकर अधिनियमकी दूसरी अनुसूची के नियम 48 के तहत कठोर कदम उठाया गया है।
यह आदेश सीधे तौर पर उद्योग की संपत्ति पर कानूनी शिकंजा कसता है और किसी भी प्रकार के लेनदेन पर रोक लगाता है। ईएसआईसी रायपुर द्वारा जारी नोटिस के अनुसार रायगढ़ प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर 10 करोड़ 42 लाख रुपये से अधिक की राशि बकाया है, जो अक्टूबर2025 तक की स्थिति के अनुसार दर्शाई गई है। इसके अतिरिक्त इस राशि पर आगे भी ब्याज देय रहेगा।
आदेश में साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समयसीमा में भुगतान नहीं किया गया तो 17.38 हेक्टेयर की पूरी औद्योगिक भूमि को कुर्क कर बकाया राशि की वसूली की जाएगी। यह जमीन रायगढ़ जिले के बेलदुला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बान्जीपाली में स्थित है और इसमें दर्जनों खसरा नंबर शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कार्रवाई प्रतीकात्मक नहीं बल्कि पूरी औद्योगिक परिषद पर है।

बिक्री, हस्तांतरण और मुनाफे पर लगाई गई पूरी तरह से रोक
ईएसआईसी के निषेधात्मक आदेश के तहत मोहन जूट मिल की जमीन, भवन और उससे जुड़ी संपत्तियों को बेचने, स्थानांतरित करने, गिरवी रखने या किसी भी प्रकार का लाभ उठाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि फिलहाल संपत्ति का भौतिक कब्जा नहीं लिया गया है, लेकिन कानूनी रूप से मालिकाना अधिकारों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आदेश की प्रतिलिपि तहसीलदार रायगढ़ और उप पंजीयक भूमि एवं राजस्व रायगढ़ को भी भेजी गई है, ताकि किसी भी प्रकार का पंजीयन या दस्तावेजी लेनदेन रोका जा सके।
नोटिस के बाद किससे होगी रिकवरी
ईएसआईसी के इस रिकवरी नोटिस के बाद आखिर वसूली किससे और कैसे की जाएगी, यह बड़ा सवाल है।जूटमिल के पूर्व मालिक पवन कुमार अग्रवाल हैं। वहीं उक्त भूमि में नामांतरण के बाद अजय कुमार अग्रवाल, नवीन कुमार बंसल, श्रवण अग्रवाल, अनूप बंसल, घनश्याम डालमिया, रायगढ़ प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड के रोहन बंसल व अमित मित्तल भूमिस्वामी हैं। ऐसे में एनसीएलटी के इस नोटिस के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार शासन व प्रशासन द्वारा जूटमिल की उक्त संपत्ति की कुर्की कर मजदूरों को उनका हक दिलाया जाएगा या फिर इस जमीन पर रिहायशी कालोनी बनकर मोहन जूटमिल के मजदूरों का हक भी दफन हो जाएगा।

आभार दैनिक जनकर्म


